रायबरेली। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने इस जिले के दो साहित्यकारों को सम्मानित करने का फैसला लिया है। वर्ष 2019 के सम्मानों एवं पुरस्कारों की घोषणा शुक्रवार को उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान ने की। इसमें डा. विनय भदौरिया को निराला पुरस्कार और रमाकांत तिवारी रामिल को वंशीधर शुक्ल पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई।
वर्ष 2019 में प्रकाशित पुस्तकों पर सर्जना पुरस्कार की घोषणा की गई है, जिसमें चयनित की गई पुस्तकों पर 40 हजार रुपये प्रदान किए जाएंगे। इसके अंतर्गत रमाकांत तिवारी रामिल को उनकी अवधी में प्रकाशित पुस्तक माटी पर वंशीधर शुक्ल पुरस्कार प्रदान किए जाने का निर्णय लिया गया है। इंदिरा नगर निवासी रमाकांत तिवारी काफी खुश हैं। वह कहते हैं कि हिंदी संस्थान से पुरस्कार मिलना गौरव की बात है। उन्होंने बताया कि माटी पुस्तक का अंतरराष्ट्रीय विमोचन वियतनाम के भारतीय दूतावास में 26 जून 2019 में हुआ था, जबकि यूपी की राजधानी लखनऊ स्थित राजभवन में 26 जुलाई 2019 को राज्यपाल ने विमोचन किया था। रमाकांत की अब तक 12 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
विभिन्न साहित्यिक संगठनों की ओर से कई बार सम्मानित भी हो चुके हैं। इसी तरह वर्ष 2019 में प्रकाशित पुस्तकों पर नामित पुरस्कार पुरस्कार के रूप में 75 हजार रुपये की धनराशि प्रदान की जाएगी। इसके अंतर्गत डा. विनय भदौरिया को उनकी पुस्तक अंतराएं बोलती हैं (गीत/मुक्तक) पर निराला पुरस्कार दिया जाएगा। विनय भदौरिया बताते हैं कि यह उनकी दूसरी पुस्तक है। इसके पहले 2008 में झूठ नहीं बोलेगा दर्पण (नवगीत संग्रह) प्रकाशित हो चुका है। लालगंज के साकेत नगर निवासी डा. भदौरिया का कहना है कि उनकी पुस्तक हिंदी संस्थान ने पुरस्कार के लिए चयनित की, यह बड़ी खुशी और गर्व की बात है। डा. भदौरिया को इसके पहले विभिन्न साहित्यिक संस्थाओं एवं सामाजिक संगठनों की ओर से सम्मान मिल चुके हैं। हिंदी संस्थान की ओर से मिलने वाला पहला बड़ा पुरस्कार होगा।
29-डॉ.विनय भदौरिया।- फोटो : RAIBARAILY