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निर्बाध बिजली देने में नाकाम साबित हो रहा बूढ़ा सिस्टम

Sat, 25 Jun 2016 12:30 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
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रायबरेली में हाईटेंशन लाइनों को छूती पेड़ की डालें। - फोटो : अमर उजाला
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 साल के चार महीने अप्रैल से जुलाई तक पावर कॉर्पोरेशन के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होते। इस बात को जानते हुए भी पावर कॉर्पोरेशन के अफसर संज्ञान नहीं लेते हैं। यदि गर्मी बढ़ी तो सब-स्टेशन ओवर लोड। हल्की हवा चली तो लाइनों में फॉल्ट।
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वहीं बूंदाबादी हुई तो पूरा सिस्टम सिकुड़ जाता है। नागरिकों और ग्रामीण हमेशा इससे दो चार होते हैं। वहीं पावरग्रिड और ट्रांसमिशन की व्यवस्था चाक चौबंद रहती है। अफसरों की मनमानी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि तीन माह के बावजूद अभी तक ट्री कटिंग के टेंडर नहीं हुए है।

इससे आए दिन लाइनों में फॉल्ट बना रहता है। वर्ष 2004 में केंद्र में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद जिले की विद्युत सुधार के लिए एपीडीआरपी योजना, राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के अलावा अमावां में 220 सब स्टेशन (पावर ग्रिड) का निर्माण में लगभग साढ़े पांच करोड़ रुपये दिए।
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इसके पहले जिले को सुल्तानपुर से बिजली मिलती थी। अमावां में पावर ग्रिड बनने से जिले को सीधे यहीं से बिजली मिलना शुरू हो गई। जिले के लोगों को आश जागी कि शायद अब निर्बाध बिजली मिलेगी, लेकिन उनका यह सपना आज तक पूरा नहीं हो सका।

पावर ग्रिड अमावां से ट्रांसमिशन त्रिपुला, बछरावां, डलमऊ और अमावां को बिजली दी जाती है। इन ट्रांसमिशन से जिले के लगभग 32 सब स्टेशनों को बिजली आपूर्ति होती है।

शरद मेहरोत्रा, अरुण गुप्ता ने बताया कि केंद्र सरकार से सबसे ज्यादा धन सब स्टेशनों के जीर्णोद्धार के लिए मिलता है। इसके बावजूद जिले को छोड़िए शहर भी कटौती से मुक्त नहीं हो पाता है। हल्की हवा या बारिश होने से बिजली गुल हो जाती है।

शंभूरतन बाजपेयी, अतुल गुप्ता ने बताया कि निर्बाध बिजली मिलने का सपना अभी तक पूरा नहीं हो सका है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद अभी तक पुराने और जर्जर तारों को नहीं बदला जा सका है।

विद्युत वितरण खंड प्रथम अशोक कुमार ने बताया कि शहर में 22 घंटे निर्बाध बिजली देने का पूरा प्रयास किया जाता है। लाइनों में फॉल्ट या अन्य समस्या आने पर बत्ती काटी जाती है। पेड़ों की छटाई के लिए वर्क ऑडर तैयार किया जा रहा है।
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जल्द ही पेड़ों की छटाई कराई जाएगी। ताकि उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिल सके।
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