रायबरेली। शहर की करीब ढाई लाख आबादी को बिजली समस्या से राहत नहीं मिल रही है। घंटे में 10 बार ट्रिपिंग से लोगों का जीना दुश्वार है। बिजली आपूर्ति का जर्जर ढांचे के सुधार में भले ही लाखों रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन बिजली आपूर्ति में कोई सुधार नहीं हो रहा है। प्रगतिमपुरम और तेलियाकोट उपकेंद्र से जुड़े उपभोक्ताओं सबसे ज्यादा बेहाल है।
शुक्रवार की रात तेलियाकोट और प्रगतिपुरम उपकेंद्र से जुड़े मोहल्लों की बिजली बेपटरी रही। रात 12 बजे तक बिजली की आवाजाही लगी रही। इससे लोगों में नाराजगी है। ग्रामीण क्षेत्रों की हालत तो और खराब है। आने-जाने का कोई समय नहीं है।
भले ही शेड्यूल 18 घंटे सप्लाई का है, लेकिन बमुश्किल 8 से 10 घंटे ही बिजली मिल रही है। गर्मी और उमस के बीच बिजली हर किसी को रुला रही है। शहर में 24 घंटे और ग्रामीण अंचलों में 18 जबकि तहसील मुख्यालय पर 20 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है।
सभी जगह शेड्यूल के हिसाब से बिजली नहीं मिल रही है। बिजली नहीं आने से जहां व्यापारियों का कारोबार प्रभावित हो रहा है, वहीं लोगों की नींद हराम हराम होती है। बिजली कटौती से बच्चे, बुजुर्ग, महिलाएं सभी का हाल बेहाल है।
सुधार के नाम पर होती खानापूर्ति
शहर की बिजली आपूर्ति सुधरने का नाम नहीं ले रही है। बिजली कटौती से हर कोई परेशान है। बब्बी शुक्ला, फिरोज नूरी, अमित मिश्रा, गुलशन जायसवाल का कहना है कि शहर की बिजली गांवों से बदतर हो गई है। एक घंटे भी निर्बाध बिजली नहीं मिल पा रही है। दिन और रात बिजली का आना-जाना लगा रहता है। अनुरक्षण के नाम पर धन का बंदरबांट किया जाता है। सुधार के नाम पर कोई प्रयास नहीं हो रहे है।
भरपूर बिजली दिलाने के लिए हो रहे पूरे प्रयास
शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों में उपभोक्ताओं को भरपूर बिजली मिले। इसके लिए प्रयास किए जा रहे है। फॉल्ट आने पर अवर अभियंताओं को तत्काल ठीक कराकर सप्लाई के निर्देश दिए गए है। बिजली की मांग बढने की वजह से कुछ समस्याएं आती है, जिन्हें समय से दूर कराया जा रहा है।
-वाईएन राम, अधीक्षण अभियंता, पावर कॉर्पोरेशन