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Raebareli News: नेपाल की आग से झुलसा सलोन का आलू

Sat, 13 Sep 2025 01:22 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
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सलोन। नेपाल में जेन-जी आंदोलन की आंच लाल आलू की बिक्री पर भी पड़ रही है। सलोन के लाल आलू की मांग बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ में अधिक है। इन राज्यों से ही नेपाल की मंडी में लाल आलू जाता है। नेपाल में आंदोलन होने से आलू के दाम में 100 से 150 रुपये प्रति क्विटंल की गिरावट आई है।
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आलू आढ़तियों का कहना है कि बाराबंकी का आलू नेपाल नहीं जा रहा है। इस कारण सलोन के आलू के दाम घट गए हैं। जिन राज्यों में सलोन का आलू जाता है, वहां अब बाराबंकी का लाल आलू भी पहुंच रहा है। रायबरेली के सलोन का लाल आलू प्रदेश में अव्वल है। करीब 2.5 से तीन हजार हेेक्टेयर में लाल आलू की खेती होती है। यह आलू शुगर फ्री होता है। इस वजह से इसकी मांग अधिक रहती है। यह आलू हर मौसम में लंबे समय तक सुरक्षित रहता है। नेपाल में जब से आंदोलन शुरू हुआ है। उसकी चोट सालोन के आलू व्यवसाय को भी लगी है।

प्रदेश में सलोन एक ऐसा क्षेत्र है, जहां सबसे अधिक लालू आलू की पैदावार होती है। यही कारण है कि यहां पर 22 कोल्ड स्टोरेज हैं। 50 आढ़ती मंडी में लाल आलू की खरीद फरोख्त करते हैं। नेपाल में चल रहे आंदोलन का असर लाल आलू पर पड़ने लगा है। दाम कम हो रहे हैं और आढ़तियों का कहना है कि यदि नेपाल में स्थिति नियंत्रण में नहीं आई तो लाल आलू के बाजार को बड़ा झटका लगेगा।
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बिहार से सबसे अधिक लाल आलू नेपाल जाता है और वहां से अभी इस पर रोक लगी है। इस कारण बिहार में लाल आलू के व्यापारियों ने लाल आलू की खरीद को कम कर दिया है। जब तक नेपाल के हालात सही थे, बिहार के व्यापारी बराबर सलोन के आढ़तियों से संपर्क कर आलू की डिमांड कर रहे थे। अब ऐसा नहीं है। लाल आलू की बिक्री दस फीसदी कम हुई है। इसके अभी और कम होने की आशंका है।

सलोन के आलू आढ़ती इरशाद एंड ब्रदर्स फर्म के प्रोपराइटर इरशाद राईनी ने बताया कि नेपाल में बाराबंकी जिले के आलू की सप्लाई होती है, लेकिन वहां आंदोलन के कारण बाराबंकी का आलू नहीं जा रहा है। जिस कारण सलोन का आलू बिहार और झारखंड भेजा जा रहा है तो वहां के बाजार में अब बाराबंकी का आलू आने लगा है, इससे सलोन के आलू का भाव मंडियों में 100 से 150 रुपये प्रति क्विंटल टूट गया है।

मो. शरीफ एंड कंपनी के प्रोपाइटर मो. सलीम ने बताया कि नेपाल में जो आंदोलन हो रहा है, उसने लाल आलू को झटका दिया है। दाम 100 से 150 रुपये गिर गए हैं। लाल आलू 900 रुपये से 1000 रुपये प्रति क्विंटल में बिक रहा था।


शीतगृहों पर छाया सन्नाटा
सलोन में सबसे अधिक 40 शीतगृह हैं। यहां हर दिन आलू की खेप ट्रकों से रवाना होेती है। जब से नेपाल के हालात बिगड़े हैं, ट्रकों की लोडिंग कम हुई है। इस समय तीन से चार ट्रक ही आलू की लोडिंग हो रही है। शीतगृहों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। आढ़ती अपना सारा आलू शीतगृहों में स्टोर किए हैं। कारण, लाल आलू की पूरे साल मांग रहती है और इस कारण खेतों से खोदाई करने के बाद इनको शीतगृहों में रखा जाता है।
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