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गांव की सरकार के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे प्रत्याशी

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रायबरेली। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में इस बार तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। कहीं वोटरों को घर बुलाने के लिए किराए की व्यवस्था की जा रही तो कहीं न चाहते हुए भी वोटरों को खुश करने के लिए उनके पैर छूना पड़ रहा है। फोन पर परदेसी वोटर से बात कर उससे आकर वोट डालने की गुहार लगाई जा रही है।
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नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद गांवों में प्रधान पद के चुनाव के लिए प्रचार चरम पर है। जिले में प्रधान पद के चुनाव में सबसे ज्यादा उत्साह दिख रहा है। दिन-रात प्रत्याशी वोटरों को रिझाने में जुटे हैं।
कोई सुबह नमस्ते करने पहुंच रहा है तो कोई शाम को पीने तक का इंतजाम कर रहा है। परदेसी वोटरों को बुला कर अपने पक्ष में वोट डलवाने के लिए सभी हथकंडे अपनाएं जा रहे हैं। कहीं खाते में किराया भेजा जा रहा है तो कहीं घर आते ही किराए के रुपये दिए जा रहे हैं।
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प्रत्याशी न चाहते हुए भी अपने न पसंद लोगों के दरवाजे हाथ जोड़ कर खड़े हैं। गांव में अपनी सरकार बनाने के लिए दावेदार परदेसी वोटरों के आने जाने का पूरा खर्च झेलने को तैयार हैं।
कोई ट्रेन से तो कोई बस से आने के अलावा प्राइवेट वाहनों से भी वोटरों को बुलाने का प्रयास किया जा रहा है। सुबह से शाम तक नाश्ते आदि के साथ ही रात में शराब की भी भरपूर व्यवस्था हो रही है।
पांच साल जो सुख दुख में आया उसी को वोट
प्रधान पद के लिए चुनाव लड़ रहे कई प्रत्याशी तो पूरे पांच साल गांव के लोगों के सुख दुख में कभी भी साथ खड़े नहीं हुए। मैदान में आने के बाद बर्ताव ऐसा कर रहे हैं कि यही वोटरों के सच्चे हमदर्द हैं।
पांच साल तक प्रधान न रहते हुए भी जिन प्रत्याशियों ने लोगों के हर सुख दुख में साथ दिया, उन्हीं को वोटर पसंद भी कर रहे हैं। हालांकि कभी भी लोगों के सुख दुख में खड़ा न होने वाले ऐसे लोग ऐसे प्रत्याशियों के खिलाफ भ्रामक प्रचार करके वोटरों को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।
सोशल मीडिया का इस्तेमाल
डीडीसी से लेकर प्रधान तक के प्रत्याशी सोशल मीडिया का प्रयोग प्रचार में कर रहे हैं। वाट्सएप के साथ ही फेसबुक पर भी वोट मांग रहे हैं। हालांकि प्रशासन सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने वाले प्रत्याशियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। गुड़ मार्निंग से लेकर गुड़ नाइट तक चुनाव चिह्न के साथ सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा है।
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