नसीराबाद/सरेनी/गदागंज। होली पर फाग गायन का ऐसा रंग बिखरा कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो गया। कहीं चौपाल में फाग गायन हुआ तो कहीं जुलूस निकले तो फाग गाती टोलियों ने हर किसी को अपनी ओर आकर्षित किया। इसके जरिये पुरानी परंपराएं जीवंत हो गईं। गांवों में ऐसे आयोजनों का नई पीढ़ी ने भी खूब आनंद लिया। नसीराबाद कस्बे में डेला महारानी व हसन मियां की कोठी से फाग होली जुलूस निकले, जो कस्बे की गलियों से होते हुए मोहल्ला हाता में एक हुए और नसीराबाद थाने पहुंचे।
थाने में पुलिसकर्मियों संग अबीर-गुलाल एवं फूलों की होली खेली। इसके बाद फुलवारी, कोरियाना, कुर्मियाना, बंगला, कायस्थाना, शिव नगर, मऊ तिराहा, बस स्टॉप होता हुआ जुलूस डेला महारानी मंदिर में समाप्त हुआ। रास्ते में नगाड़े की धुन पर फाग गीतों के बीच बूढ़े-बच्चे सब थिरकते रहे। बाबू लाल की भजन मंडली भी साथ रही। इस मौके पर पवन श्रीवास्तव, अरविंद मौर्य, रामजी गौड़, उमाशंकर चौरसिया, रामेश्वर वैश्य, राम तिलक पासी, पंकज श्रीवास्तव, कुलदीप वैश्य, सुरेश चौरसिया, राजेश अग्रहरी, मोनू अग्रहरि, सुनील वैश्य, आलोक मोदनवाल, मोहित अग्रहरी, प्रमोद श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
सरेनी में होलिका दहन के बाद गांवों की चौपालों में फाग गायन हुए। सभी ने एक-दूसरे को रंग और गुलाल लगाया। फाग गायन के दौरान कलाकारों ने ओज एवं श्रृंगार रस की रचनाएं सुनाकर माहौल को होली के रंग में रंग दिया। अवध मां राणा भयो मर्दाना..., बक्सर मां भगदरि भई भारी... समेत अन्य गीत गूंजे। बुंदेलखंडी गीत भी प्रस्तुत किए गए। गदागंज क्षेत्र में फाग की पुरानी परंपरा को पूर्व प्रधान ने युवाओं के साथ मिलकर जीवंत किया। पूर्व प्रधान शिव मोहन ने फाग की संस्कृति से लोगों को परिचित कराया। इस मौके पर शिव शंकर, गंगा मिश्रा, अनूप त्रिवेदी, धीरज बाजपेयी, अमरनाथ, प्रदीप मौजूद रहे।