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पंचायत चुनाव का अंतिम पड़ाव पूरा, अब दौड़ेगा विकास का पहिया

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रायबरेली। साढ़े तीन माह की गहमागहमी के बाद शनिवार को पंचायत चुनाव का आखिरी पड़ाव भी पूरा हो गया। ऐसे में अब गांवों के विकास की बारी है। पहले प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्य के चुनाव हुए।
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इसके बाद जिला पंचायत अध्यक्ष चुना गया। अब ब्लॉक प्रमुख के नतीजे भी आ गए। पंचायत चुनाव में भाग लेकर वोटरों ने जिस तरह दावेदारों के सिर जीत का सेहरा बांधा, उसी उम्मीद के साथ अब विजेता चुने गए दावेदारों को उनकी कसौटी पर खरा उतरना होगा।
चाहे ग्राम प्रधान हों या फिर जिला पंचायत अध्यक्ष या फिर ब्लॉक प्रमुख। इन सबको गांवों का विकास प्राथमिकता के साथ कराना होता है। इसके लिए शासन से भारी भरकम बजट भी उपलब्ध कराया जाता है।
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वैसे तो पंचायत चुनाव दिसंबर माह में पूरे हो जाने चाहिए थे, लेकिन कोरोना की वजह से देरी हुई। जिले के 18 ब्लॉक प्रमुख पद के चुनाव नतीजे आने के बाद वर्ष 2021 के अप्रैल माह से जुलाई माह तक पंचायत चुनाव का शोर शनिवार से थम गया। ग्राम प्रधानों के माध्यम से गांवों में विकास कार्य शुरू करा दिए गए हैं, लेकिन जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों को अभी शपथ लेना बाकी है।
शपथ लेने के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुखों की तरफ से भी विकास के कार्य कराए जाने शुरू हो जाएंगे। ऐसे में गांवों में विकास की रफ्तार तेज होगी। विकास के नए पैमाने तय होंगे।
इससे लोगों को आवास, सोलर लाइट और गांवों को आने जाने के लिए पक्की सड़क और खड़ंजा नसीब हो सकेगा। खुशी से लबरेज विजेता ब्लॉक प्रमुखों ने कहा कि चुनाव में जीत मिली है। अब क्षेत्र का विकास कराना उनकी पहली प्राथमिकता होगी। क्षेत्रीय लोगों से जो वादे किए थे, उसे हर हाल में पूरा करने का प्रयास करेंगे।
बदल गए सियासी समीकरण
ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में सियासी समीकरण बदल गए। शनिवार को नतीजे घोषित हुए तो चुनाव परिणाम से हैरान था। ऊंचाहार, रोहनियां, छतोह ब्लॉक में ऐसे दावेदार ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी पर काबिज हो गए, जिनके जीतने की उम्मीद शायद ही राजनीतिज्ञ लगाए हुए थे। इन सियासी समीकरण ने क्षेत्र में नई राजनीति की लकीर खींच दी है। खासकर ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत हासिल करके सबको चौंका दिया।
दिग्गजों की बची साख, ली राहत की सांस
शनिवार को आए नतीजों से दिग्गजों की साख बच गई। अमावां ब्लॉक की सीट से सदर विधायक अदिति सिंह की मां वैशाली सिंह, जबकि हरचंदपुर सीट से एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह के बेटे पीयूष प्रताप सिंह चुनाव जीतने में सफल रहे। सबसे दिलचस्प मुकाबला शिवगढ़ ब्लॉक की सीट पर रहा। नौ साल की शमा बानों ने सिक्का उछाला। तब जाकर पूर्व एमएलसी राकेश प्रताप सिंह के बेटे हनुमंत सिंह की जीत हो सकी। रोहनियां ब्लॉक सीट से सपा प्रत्याशी ने जीत हासिल की। ऐसे में क्षेत्रीय विधायक एवं पूर्व मंत्री डॉ.मनोज कुमार पांडेय अपनी साख बचाने में कामयाब रहे।
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