रायबरेली। कोरोना मरीजों के लिए प्राण वायु (ऑक्सीजन) मुहैया करवाने में स्वास्थ्य विभाग को 35 लाख रुपये से अधिक रुपये खर्च करने पड़े हैं। एम्स के एल-3 अस्पताल में मरीजों के लिए करीब 14 लाख और रेलकोच फैक्टरी के एल-2 व जिला अस्पताल के लिए भी 16 लाख से अधिक कीमत की ऑक्सीजन खरीदी गई। स्वास्थ्य विभाग ने कई लाख रुपये की ऑक्सीजन लखनऊ से मंगवाई है। हालांकि अब डिमांड कम है।
जिले में अप्रैल महीने में कोरोना ने कहर बरपाया। शुरू के 15 दिन तो ठीक रहे, लेकिन आखिरी के 15 दिनों की यादें लोगों के जेहन में किसी बुरे सपने से कम नहीं होंगी। अब तक जिले में कोरोना से मौतों और संक्रमित होने के कुल आंकड़े का आधा हिस्सा अप्रैल के 15 दिन में ही पूरा हो गया।
अप्रैल के शुरू में तो विभाग लखनऊ से ऑक्सीजन मंगवाता था, लेकिन डिमांड बढ़ने के बाद जिले के इकलौते शहर से सटे गंगागंज स्थित गजबदन इंड्रस्ट्रियल एवं मेडिकल गैसेज प्लांट को अधिग्रहीत करना पड़ा। प्लांट से सिर्फ कोविड अस्पतालों के लिए ही ऑक्सीजन की आपूर्ति शुरू करवानी पड़ी।
हर रोज 500 से अधिक ऑक्सीजन सिलेंडर भरकर एम्स के एल-3, रेलकोच के एल-2 और जिला अस्पताल पहुंचाए गए। अकेले एम्स में मरीजों के लिए करीब 14 लाख रुपये की ऑक्सीजन मंगवानी पड़ी।
रेलकोच के एल-2 अस्पताल और जिला अस्पताल में भर्ती कराए गए मरीजों के लिए भी 16 लाख से अधिक कीमत की ऑक्सीजन प्लांट से मंगवानी पड़ी। हालांकि प्लांट को अब तक पूरा भुगतान भी नहीं दिया गया है। किसी तरह लिक्विड मंगवाकर जिले में ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दी गई।
ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दी गई: सुमित
गंगागंज स्थित गजबदन इंड्रस्ट्रियल एंव मेडिकल गैसेज प्लांट के संचालक सुमित चौबे का कहना है कि अप्रैल महीने के 15 दिनों में ऑक्सीजन की उपलब्धता करवाना बहुत की कठिन हो गया था, लेकिन मरीजों के लिए किसी भी स्तर पर ऑक्सीजन की कमी नहीं होने दी गई।
दिन रात प्लांट को चलाकर कोविड अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति करवाई गई है। आगे भी जब भी जरूरत होगी, प्लांट दिनरात काम करके मरीजों को बचाने के लिए ऑक्सीजन मुहैया कराएगा।
प्लांट से से ली गई ऑक्सीजन के लिए भुगतान करवाया जा रहा है। कुछ भुगतान कर दिया गया है। शेष धनराशि का पेमेंट जल्द ही करवाया जाएगा। अब जरूरत के हिसाब से ऑक्सीजन ली जा रही है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ