गंगा का जलस्तर हर घंटे एक सेंटीमीटर चेतावनी बिंदु की ओर बढ़ रहा है। शनिवार को जलस्तर 96.100 मीटर पहुंच गया। खेतों में पानी घुसने लगा है। इससे कटरी क्षेत्र के ग्रामीणों में हड़कंप मच गया है। वहीं तहसील प्रशासन बाढ़ से निपटने के पूरे इंतजाम किए जाने का दावा कर रहा है।
नदी का चेतावनी बिंदु 98.360 मीटर और खतरे का निशान 99.360 मीटर है। चेतावनी बिंदु के सापेक्ष पानी 96.100 मीटर पहुंच गया है। घाटों की सीढ़ियां पानी से डूब गई हैं। साथ ही अंबहा, बबुरा, पूरे रेवती सिंह, चकमलिक भीटी, जहांगीराबाद, नेवादा पट्टी, भीरनपुर, रामपुर लूक आदि गांवों के खेत में पानी जाने लगा है।
ग्रामीण रामदीन, संतराम, राम अवतार व रामकुमार का कहना है कि लगातार नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। इससे रात की नींद उड़ गई है। खेतोें तक पानी पहुंचने लगा है। यही हाल रहा तो उड़द, सरसों की खेतों में बोई गई फसल डूबकर खराब हो जाएगी।
यह कोई पहला मौका नहीं। हर साल गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण कटरी क्षेत्र के लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। बारिश होने पर गंगा का पानी बढ़ जाता है। चूंकि यह गांव गंगा के किनारे हैं। ऐसे में बाढ़ आने पर लोगों की खासकर फसलें खराब होने का दंश झेलना पड़ता है। इस बार भी बढ़ते जलस्तर से ग्रामीण चिंतित हैं।
नदी का जलस्तर कितना बढ़ा और कितना घटा, इसकी पूरी जिम्मेदारी केंद्रीय जल आयोग की है। बावजूद आयोग में तैनात अधिकारी, कर्मचारी नदी का जलस्तर की जानकारी देने में आनाकानी कर रहे हैं। शनिवार को उन्होंने यह कहते हुए जानकारी देने से इंकार कर दिया कि हमें कुछ नहीं पता।
कानपुर से जलस्तर के बारे में जानकारी लीजिए। यहीं दफ्तर भी मनमाने तरीके से खुल रहा है। यह हाल तब है, जब जलस्तर दिनोंदिन बढ़ रहा है। हालांकि बाद में तहसील के अफसरों से जानकारी करने पर जलस्तर की जानकारी हो सकी।
एसडीएम डलमऊ क्षत्रपाल का कहना है कि गंगा का जलस्तर हर घंटे एक सेमी. की रफ्तार से बढ़ रहा है। बाढ़ से निपटने के पूरे इंतजाम हैं। लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। हालांकि अभी बाढ़ जैसी स्थिति नहीं हैं।