डलमऊ (रायबरेली)। गाजियाबाद में अंत्येष्टि स्थल की छत गिरने से 24 लोगों की मौत होने के बाद भी यहां के अफसर सबक लेने को तैयार नहीं हैं। यहां पर थोड़ी सी चूक हादसे की वजह बन सकती है। वजह डलमऊ गंगाघाट पर बने शवदाह गृह और शव यात्री कक्ष के पिलर और छतों में दरारें आ गईं हैं।
यहां शवों का अंतिम संस्कार करने के लिए रायबरेली के साथ ही लखनऊ, उन्नाव, फतेहपुर, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, बाराबंकी व अमेठी आदि जनपदों के लोग पहुंचते हैं। जिसे देखते हुए सांसद सोनिया गांधी की प्रेरणा से जिला पंचायत रायबरेली द्वारा श्मशान घाट डलमऊ में शवदाह गृह और शव यात्री कक्ष का निर्माण लगभग दो वर्ष पूर्व कराया गया था। इसके बाद दोनों को नगर पंचायत डलमऊ के हैंडओवर कर दिया गया था।
क्षेत्रीय लोगों की मानें तो निर्माण कार्य में जमकर कमीशनखोरी हुई, नतीजतन दो साल में ही यह जर्जर हो गया। निर्माण कार्य में मानकों की अनदेखी के चलते बनाए गए शवदाह ग्रह-शव यात्री कक्ष कुछ ही वर्षों में जर्जर स्थिति में पहुंच गए हैं। इस निर्माण कार्य के पिलर और छत में दरारें आ गई हैं, जिससे कभी भी कोई अप्रिय घटना घट सकती है।
अफसरों को अवगत कराया, नहीं दिया ध्यान
कस्बे के तीर्थ पुरोहित नितिन कुमार, राम प्रसाद, श्याम सुंदर, श्याम प्रकाश, शिवाकांत का कहना है कि शवदाह ग्रह, शव यात्री कक्ष के निर्माण में कमीशनबाजी की गई। इससे दो साल में ही पिलर व छतों में दरार आ गई। मरम्मत कराने के लिए कई बार मौखिक रूप से नगर पंचायत से मांग की गई, लेकिन मरम्मत नहीं कराई गई। इससे किसी दिन कोई घटना यहां पर भी घट सकती है। नगर पंचायत द्वारा एक नए शव यात्री कक्ष का निर्माण श्मशान घाट पर कराया गया है।
गाजियाबाद की घटना के बाद डलमऊ गंगागाट पर बने शवदाह ग्रह-शव यात्री कक्ष का निरीक्षण करके हकीकत परखी गई। वर्तमान समय में दोनों की स्थिति ठीक है। आसपास गंदगी होने के कारण नगर पंचायत को साफ-सफाई के निर्देश दिए गए हैं।
सविता यादव, उपजिलाधिकारी डलमऊ