पुराने नोटबंदी की दिक्कत अब लोगों की मौत का सबब बनने लगी है। रुपये के अभाव में दो महिलाओं का इलाज नहीं हो सका और उनकी मौत हो गई। परिवार वालों का आरोप है कि महिलाएं दो दिन धन निकासी के लिए बैंक पहुंच लाइन में लगती थीं।
लेकिन जब तक उनका नंबर आता, करेंसी समाप्त हो जाती। ऐसे में इलाज न होने से दोनों महिलाओं की सांसें गुरुवार को हमेशा के लिए थम गई। इससे ग्रामीणों व परिवारीजनों में नाराजगी है।
डीह ब्लॉक क्षेत्र के गोपालपुर मजरे रायपुर टोडी गांव की रहने वाली बदरूनिशा (40) का भारतीय स्टेट बैंक की शाखा मऊ में खाता है। बदरुनिशा बीमार चल रही थी। इलाज के लिए उसके पास धन नहीं था। मंगलवार को बदरुनिशा पैसा निकालने गई।
दिनभर लाइन में लगने के बाद भी पैसा नही मिला। बुधवार को अपने बेटे जबिराइल के साथ फिर पैसा निकालने गई, लेकिन पैसा नही मिला। लाइन में लगने से उसकी हालत और बिगड़ गई। देर शाम उसकी हालत गंभीर होने पर परिवारीजन उसे लेकर नसीराबाद सीएचसी जा रहे थे, लेकिन रास्ते में उसने दम तोड़ दिया।
उसकी मौत की जानकारी गुरुवार को हुई। बेटे जबिराइल का कहना है कि रुपया न होने के अभाव में मां का इलाज नहीं करा सका। इससे उसकी मौत हो गई। दूसरा मामला भी इसी गांव का है। गांव की रहने वाली फूलमता (50) पत्नी बैजनाथ भी दो दिन बैंक गई, लेकिन उसे रुपया नहीं मिल सका।
फूलमता भी बीमार चल रही थी। धन निकासी नहीं हो पाई थी। लाइन में लगने से उसकी हालत और बिगड़ गई। उसे जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ताज मोहम्मद का कहना है कि दोनों महिलाएं बीमार चल रही थी।
धन नहीं निकल पा रहा था। लाइन में लगने से दोनों की हालत और बिगड़ गई थी। इसी वजह से दोनों की मौत हुई है।