रोटी, दाल, चावल और लड्डुओं का भोग लगाया। इस दौरान घर की साफ-सफाई और शुद्धता का खास ख्याल रखा गया। पूर्वांचल में छठ पूर्व का बड़ा ही महत्व है। इसी लिए इसे महापर्व कहा जाता है।
वैसे तो छठ पूजा की तैयारी कई दिनों से चल रही थी, लेकिन सोमवार का दिन लोगों के लिए खास रहा। महिलाएं पूरे दिन निर्जला व्रत रहीं। वहीं घर के अन्य सदस्य पूजा की तैयारियों में जुटे रहे।
सुबह से ही घर की साफ-सफाई की गई। घरों में प्रसाद के लिए चने की दाल, चावल, रोटी समेत अन्य व्यंजन बनाए गए। व्रत रखने वाली महिलाओं ने देर शाम हवन के बाद पूजन-अर्चन कर प्रसाद ग्रहण किया।
शहर के गांधी नगर की रहने वाली शैला देवी ने खरना व्रत रखा। दिल्ली से उनकी छोटी बहन रजनी भी छठ पर्व पर यहां आईं है। उन्होंने पहले हवन किया।
फिर सूर्य देव को चना की दाल, चावल, लड्डुओं और रोटी का भोग लगाया। बच्चों और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
इसी तरह सोनिया नगर की रहने वाली लीला देवी, सावित्री देवी, ममता देवी, शीला देवी ने भी पूजा-अर्चना कर भगवान से मनौती मानी। पूजा-अर्चना के बाद सभी ने खरना व्रत रखने वाली घर की सदस्य का आशीर्वाद लिया।
छठ पूजा के मद्देनजर सोमवार को बाजार में खास रौनक रही। घंटाघर, डिग्री कॉलेज चौराहा, कैपरगंज, सब्जी मंडी, बस स्टेशन, जिला अस्पताल चौराहा, सिविल लाइंस समेत अन्य प्रमुख बाजारों में अच्छी खासी भीड़ थी।
फल के ठेलों और ठेलियों पर लोगों का जमावड़ा लगा रहा, क्योंकि मंगलवार को सूर्यदेव को अर्घ्य देने के लिए पूजा में फल रखे जाएंगे। इसलिए लोगों ने फलों की जमकर खरीदारी की।
सेब, केला, अमरूद समेत अन्य कई तरह के फल खरीदे गए। गन्ना और सिंघाड़ा की भी खूब बिक्री हुई। वहीं नगर पालिका परिषद के चेयरमैन मो. इलियास ने बताया कि छठ पूजा को देखते हुए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
शहर के राजघाट, शहीद स्मारक और शारदा सहायक नहर के पास साफ-सफाई करा दी गई है। घाटों पर पंडाल लगाकर कुर्सिंया भी रखवाई गई हैं। जिससे लोगों को बैठने में दिक्कत न हों।
रोशनी के लिए प्रकाश की भी पूरी व्यवस्था की गई है। अफसरों और कर्मचारियों को लापरवाही न बरतने के लिए कहा गया है।