रायबरेली। शहर की हवा को शुद्ध करने के लिए 10 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए, लेकिन हाथ निराशा लगी। हालात पहले से और खराब हो गए। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में तीन लाख से कम आबादी वाले नगर पालिका क्षेत्र में रायबरेली को सातवां स्थान मिला है। 2024 में रायबरेली को पहला स्थान मिला था।
रिपोर्ट ने नगर पालिका के वायु प्रदूषण कम करने के लिए किए गए कार्यों की पोल खोल दी है। अब अफसर 2026 में बेहतर अंक आने के दावे कर रहे हैं। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम शहरों में वायु प्रदूषण को कम करने के लिए शुरू किया गया है। इसके तहत सरकार की तरफ से बजट भी दिया जाता है। बजट से सड़कें बनवाई जाती हैं। सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ अन्य कार्य कराए जाते हैं, ताकि शहरों की हवा बेहतर हो सके।
ये बनी पिछड़ने की वजह
बदहाल सड़कों ने शहर की तस्वीर बदल दी है। जेल रोड, मधुबन रोड, नया पुरवा रोड समेत शहर की ज्यादातर सड़कें गड्ढों में तब्दील हैं। हालात ये हैं कि सड़कों से धूल उड़ रही है। इससे आम जनता और दुकानदार परेशान हैं। प्रमुख चौराहों जिला अस्पताल, घंटाघर चौराहा, पुलिस लाइन की सड़कों पर चलना जोखिम भरा है। सड़कों की बेहतरी की दिशा में ध्यान नहीं दिया गया।
शहर को साफ सुथरा बनाने के लिए शुरू की गई कूड़ा कलेक्शन योजना फ्लाप साबित हुई। वार्डों से शत प्रतिशत कूड़े का उठान नहीं हो पाया। सड़कों की सफाई के लिए रोड स्वीपिंग मशीन उपलब्ध है, बावजूद सफाई कितनी होती है, यह सड़कों की हालत देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है। पौधरोपण कराने के नाम पर महज कागजी कोरम पूरा किया गया। बिजली कटौती भी सातवें स्थान पर खिसकने की वजह बनी।
बिजली कटौती से कट गए अंक
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण 2025 में नगर पालिका परिषद रायबरेली को 192.5 अंकों के साथ सातवां स्थान मिला है। वर्ष 2024 में 193.5 अंकों के साथ पहला स्थान मिला था। इस बार जब टीम स्वच्छ वायु सर्वेक्षण करने शहर आई थी तो सात मिनट के लिए बिजली कटौती हो गई थी। इस कारण अंक कट गए थे। सर्वेक्षण के दौरान 24 घंटे बिजली रहना भी जरूरी होता है।
- मो. आरिफ, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, स्वच्छ भारत मिशन
शहर की हवा शुद्ध करने के लिए बेहतर प्रयास किए गए थेे। बावजूद इसके स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में रायबरेली का सातवां स्थान आया है। जो कमियां रह गई हैं, उसे दूर कराया जाएगा, जिससे 2026 में रायबरेली को पहला स्थान मिल सके।
- स्वर्ण सिंह, ईओ, नगर पालिका परिषद, रायबरेली