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Raebareli News: मंत्री जी... समितियों में पड़े ताले, खाद के लिए भटक रहे किसान

Tue, 24 Jun 2025 01:07 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
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साधन सहकारी समिति के बाहर पसरा सन्नाटा।
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रायबरेली। कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही को राजधानी में उर्वरक की दुकानों पर खामियां मिली थीं। ग्राहक बनकर पहुंचे मंत्री से दुकानदारों ने खाद का अधिक मूल्य ले लिया था। जिले में भी खाद की उपलब्धता ठीक नहीं है। खाद न होने से सहकारी समितियों में ताले पड़े हैं। किसान यहां से मायूस होकर लौट रहे हैं। यह स्थिति तब है जब किसान धान की रोपाई करना चाह रहे हैं।
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खरीफ की फसलों की बोआई से पहले ही जिले के साढ़े सात लाख अन्नदाताओं पर मुसीबत की मार है। 160 साधन सहकारी समितियों और 1200 निजी दुकानों पर यूरिया और डीएपी का संकट है। किसान न तो धान की रोपाई कर पा रहे हैं और न ही अन्य फसलों की बोआई। थोक विक्रेताओं के पास खाद है, लेकिन वह ज्यादा रेट पर निजी दुकानदारों को खाद बिक्री करना चाहते हैं।

ऐसे में निजी दुकानदार थोक विक्रेताओं से खाद खरीदने में किनारा कर रहे हैं। सतांव के एक निजी दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एक बोरी डीएपी की कीमत 1350 रुपये है। थोक विक्रेता 1430 रुपये में दे रहे हैं। ऐसे में हम खाद खरीद भी लें, लेकिन किसान महंगे रेट पर खाद नहीं लेगा। ऊपर से उनके खिलाफ कार्रवाई भी हो जाएगी।
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शिवगढ़ प्रतिनिधि के मुताबिक साधन सहकारी समितियों में खाद नहीं है। इससे लोग परेशान हैं। नसीराबाद प्रतिनिधि के मुताबिक साधन सहकारी समितियों और प्राइवेट दुकानों पर खाद की किल्लत से किसान परेशान हैं। धान की रोपाई कैसे होगी। समितियों में लटके ताले

डीह। साधन सहकारी समिति डीह, टेकारीदांदू, मऊ, खेतौंधन, पदमनपुर बिजौली में यूरिया और डीएपी नहीं है। समितियों में ताले लटक रहे हैं। किसान प्रदीप कुमार, शिवप्रसाद ने बताया कि धान की रोपाई के लिए डीएपी की जरूरत है। साधन सहकारी समिति पहुंचे तो ताला लटकता रहता है। सचिव से पूछे तो बोलते हैं, जब खाद आएगी, तब मिलेगी। प्राइवेट दुकानों पर भी खाद नहीं है।


थोक विक्रेताओं की बंद हो मनमानी
सतांव। ब्लॉक क्षेत्र में आठ सरकारी साधन सहकारी समितियां और 130 प्राइवेट दुकानें हैं। समितियों और प्राइवेट दुकानों पर न तो डीएपी और न ही यूरिया है। कुछ समितियों पर सिर्फ नैना खाद उपलब्ध है। किसान इंद्रपाल, बबलू, राजेश कुमार, भीखूराम कहते हैं कि जरूरत के समय पर खाद कभी नहीं मिलती। प्राइवेट दुकानदार कहते हैं कि थोक विक्रेता डीएपी 1450 रुपये में देते हैं। यदि दुकान पर खाद लाकर बेचेंगे तो किसानों को 1600 रुपये में देनी पड़ेगी। ऐसे में किसान नाराजगी जताएंगे। ऐसे में थोक विक्रेताओं की मनमानी बंद होनी चाहिए।

घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिली खाद
बछरावां। ब्लॉक क्षेत्र की कसरावां, इचौली, नीमटीकर, बन्नावां समेत 10 साधन सहकारी समितियों में न तो डीएपी और न ही यूरिया है। प्राइवेट दुकानों का हाल यही है। इफको केंद्र बछरावां में डीएपी व यूरिया तो उपलब्ध है, लेकिन किसानों की भीड़ ज्यादा होने के कारण हर किसान को खाद नहीं मिल पा रही है। सोमवार को खाद लेने इफको केंद्र पहुंचे किसान मायूस दिखे। किसान सुरेश, राम प्रसाद, राकेश सिंह कहते हैं कि घंटों इंतजार के बाद भी खाद नहीं मिल पाई है।

समिति पहुंचे किसान हुए निराश
लालगंज। ब्लॉक क्षेत्र की साधन सहकारी समितियों और प्राइवेट दुकानों पर डीएपी-यूरिया नहीं है। साधन सहकारी समिति गोविंदपुर वलौली में सोमवार को खाद लेने पहुंचे किसानों को निराशा हाथ लगी। किसान समरजीत ने बताया कि धान की नर्सरी तैयार है, लेकिन समितियों में डीएपी और यूरिया उपलब्ध नहीं है। एडीओ कोऑपरेटिव जितेंद्र सिंह ने क्षेत्र में करीब 700 क्विंटल टन खाद की खपत होती है। इस बार अब तक खाद की डिमांड नहीं भेजी गई है। धान की रोपाई से पहले किसानों को खाद उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।


कृषि विभाग का खाद की उपलब्धता का दावा
खाद उपलब्धता (मीट्रिक टन में)
यूरिया 29656.705
डीएपी 4994.50
पोटाश 1200.700
एनपीके 6850.25

खरीफ की फसल
फसल लक्ष्य पूर्ति
धान की नर्सरी 10782 10692
धान की फसल 161730 25207
मक्का 815 308
ज्वार 1667 0
बाजरा 78 0
उड़द 4458 0
मूंग 342 0
अरहर 1647 0
मूंगफली 145 24
तिल 6424 0
नोट-लक्ष्य और पूर्ति हेक्टेयर में है।

जिले में खाद की कोई कमी नहीं है। खरीफ की फसल की अभी शुरुआत हुई है। जुलाई तक खाद की और उपलब्धता हो जाएगी। प्रति बोरी यूरिया 266.50 रुपये और प्रति बोरी डीएपी 1350 रुपये में बिक्री करने के आदेश दिए गए हैं। अभी तक कहीं से भी अधिक पैसे में खाद बिक्री की शिकायत नहीं आई है। किसान खाद के लिए परेशान न हों।
- अखिलेश पांडेय, जिला कृषि अधिकारी
इनसेट
साधन सहकारी समितियों में खाद की उपलब्धता जल्द हो जाएगी। इसके लिए खाद की डिमांड की गई है। धान की रोपाई और फसलों की बोआई से पहले किसानों को डीएपी, यूरिया साधन सहकारी समितियों में खाद मिलने लगेगी।
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- रामसागर चौरसिया, आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता
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