रायबरेली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक मुकदमे में सुनवाई करते हुए अल्ट्रासाउंड जांच की भ्रामक रिपोर्ट देने पर मिडास स्कैन एंड लैब के संचालक पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। लैब से महिला के दाहिने गर्भाशय में सिस्ट होने की रिपोर्ट दी, जबकि हालत बिगड़ने पर लखनऊ में जांच कराई तो बाएं सिस्ट मिला।
आयोग ने 45 दिन के अंदर जुर्माने की राशि जमा करने के आदेश दिए। ऐसा न करने पर सात प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज जमा करना होगा। संचालक ने तुरंत जुर्माना जमा कर दिया।
शहर के अहियारापुर निवासी दीक्षा श्रीवास्तव ने कचहरी रोड स्थित मिडास स्कैन एंड लैब से चिकित्सक की सलाह पर 30 अप्रैल 2024 को 1320 रुपये जमा करके अल्ट्रा सोनोलॉजी की जांच कराई थी। जांच में दाहिने गर्भाशय में सिस्ट होने की बात रिपोर्ट में कही गई।
रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक ने महिला को सर्जरी की सलाह दी। इसी दौरान पेट में तेज दर्द शुरू हो गया। लखनऊ की चिकित्सक डॉ. चंद्रावती की ओपीडी ले जाया गया। चिकित्सक ने जांच की सलाह दी। मिडास में हुई जांच रिपोर्ट दिखाई। चिकित्सक ने रिपोर्ट पर आशंका जताते हुए दोबारा जांच की सलाह दी।
दोबारा लखनऊ के कृष्णा मेडिकल सेंटर से जांच कराई। यहां बाएं गर्भाशय में सिस्ट की जानकारी हुई। गलत जांच रिपोर्ट के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा। महिला ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग का दरवाजा खटखटाया।