लोगों को बक्सों में रखे स्वेटर निकाल लिए। बूंदाबांदी से छात्र-छात्राओं को भीगते हुए घरों को जाना पड़ा। देर रात तक आसमान में बदली छाई रहने से मौसम सर्द रहा।
सुबह अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। आसमान में बदली छा गई। पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न तीन बजे तक रुक-रुककर बूंदाबांदी होती रही। बदली छाने और बूंदाबांदी होने की वजह से मौसम सर्द हो गया।
लोगों को ठंड का एहसास हुआ। दोपहर में स्कूलों में छुट्टी हुई तो बूंदाबांदी हो रही थी। इससे स्कूली बच्चों को भीगते हुए घर जाना पड़ा। कुछ छात्र-छात्राओं ने बूंदाबांदी से बचने के लिए छाते का प्रयोग किया।
मौसम के सर्द होने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बुधवार को अधिकतम पारा आठ डिग्री सेल्सियस लुढ़क कर 25 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। मंगलवार को अधिकतम तापमान 33.4 डिग्री सेल्सियस था।
वहीं बदलते मौसम ने अन्नदाताओं की मुसीबत बढ़ा दी है। बुधवार को हुई बूंदाबांदी से खेतों में कटी पड़ी धान की फसल भीग गई। इससे धान की पिटाई का कार्य नहीं बाधित हो गया।
हालांकि जिले में अभी 15 फीसदी धान की फसल कट पाई है। वहीं बूंदाबांदी से तोइया, चना की फसल को फायदा हुआ है। यही नहीं बारिश कुछ और तेज हो गई तो गेहूं की बोआई में तेजी आ जाएगी।
जिले में इस बार डेढ़ लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल पर धान की रोपाई की गई थी। चूंकि इस बार बारिश न होने से निजी संसाधनों से किसानों ने धान की रोपाई की थी। इससे लेट धान की रोपाई की गई।
यही वजह है कि धान की फसल खेतों में कटी पड़ी है। सुबह बूंदाबांदी शुरू हुई तो उन किसानों के होश उड़ गए। जिनकी धान की फसल खेतों में कटी पड़ी थी।
किसान खेतों में पहुंचकर कटी पड़ी धान की फसल को दूसरे स्थान पर ले गए। इससे पिटाई का कार्य नहीं हो सका। यदि बारिश तेज हो जाती तो धान की फसल का अधिक नुकसान होता। हालांकि बूंदाबांदी से रबी की फसल के लिए फायदेमंद है। सूख रही चना, तोइया की फसल को बूंदाबांदी से फायदा हुआ है।