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ग्लैंडर्स बीमारी से संक्रमित अश्वों से मनुष्यों को भी हो सकता है खतरा: डॉ. सिंह

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रायबरेली। अश्व प्रजाति के घोड़े, गधों और खच्चरों को संक्रामक रोगों से बचाने के लिए शुक्रवार को विकास भवन सभागार में प्रशिक्षण आयोजित किया गया। मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. गजेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि अश्व प्रजाति में ग्लैंडर्स बीमारी का कोई टीका और इलाज नहीं है, इसलिए बचाव ही इसका इलाज है।
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कहा कि संक्रमित घोड़ों में त्वचा में फोड़े व घुमड़ियां, नाक के अंदर फटे हुए छाले दिखना, तेज बुखार, नाक से स्राव आदि प्रमुख लक्षण होते हैं। इस बीमारी का कोई टीका या इलाज नहीं है। यह बीमारी पशुओं से मनुष्यों में फैलती है। यह बीमारी लाइलाज और घातक है।
उन्होंने कहा कि इस बीमारी का संदेह होने पर नजदीकी सरकारी पशु चिकित्सक से संपर्क करें व पशु चिकित्सकों को समय-समय पर पशुओं का रक्त नमूना परीक्षण हेतु नमूना लेने में सहयोग करें।
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प्रशिक्षण में डॉ. वीके पांडेय, डॉ. रामशब्द एवं डॉ. दिनेश मौर्या आदि ने चिकित्सकों को बीमारी के संबंध में तकनीकी जानकारी प्रोजेक्टर के माध्यम से दी। प्रशिक्षण में नोडल डॉ. नितेंद्र सिंह ने बताया कि सर्वप्रथम इस बीमारी के लक्षण दिखने पर संबंधित पशु चिकित्साधिकारियों को अवगत कराया जाए।
इस रोग के बचाव के लिए टीम का गठन करके तत्काल इस रोग को फैलने से बचाव व घोड़े को भी बचाया जा सके। इस मौके पर डॉ. केपी सिंह, डॉ. एसके कनौजिया, डॉ. कर्णवीर सिंह, डॉ. यशपाल सिंह, डॉ. जावेद आलम, डॉ. अर्चना, डॉ. एचएन मिश्रा, आलोक पांडेय, प्रेम शंकर पांडेय आदि मौजूद रहे।
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