यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर शुक्रवार को जिलेभर की बैंक शाखाओं में पूरी तरह से तालाबंदी रही। इससे करीब पांच अरब का कारोबार ठप रहा। लेनदेन के लिए बैंक पहुंचे ग्राहकों को मायूसी हाथ लगी और उन्हें बैरंग लौटना पड़ा।
बड़े घरानों से बकाया वसूली न किए जाने समेत अन्य मांगों को लेकर हड़ताल पर रहे बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया और सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया। कहा कि उनकी मांगों को पूरा करने के लिए ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
शहर से लेकर देहात की स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, केनरा बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक, सेंट्रल बैंक समेत अन्य बैंकों की करीब 338 शाखाओं के ताले नहीं खुले।
जिला अग्रणी बैंक प्रबंधक मुकेश सिन्हा ने बताया कि यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर 338 बैंकों में पूरी तरह से हड़ताल रही। शहर से लेकर देहात क्षेत्र की बैंकों में तालाबंदी होने से ग्राहकों को परेशानी हुई और करीब पांच अरब का कारोबार ठप रहा।
बैंकों के शटर बंद होने से लेनदेन करने पहुंचे ग्राहक निराश हुए। कुछ ग्राहक तो इस उम्मीद के साथ बैठे रहे कि बैंक खुलेगा। दोपहर तक बैठे रहे और फिर मायूस होकर लौट गए। बैंक अधिकारी और कर्मचारी एक दिनी हड़ताल पर रहे। सभी ने बैंकों के सामने और फिर पंजाब नेशनल बैंक से सुपर मार्केट तक जुलूस निकाला। यहां पर नारेबाजी के साथ प्रदर्शन किया।
यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के जिला सचिव मो. अयाज और रमेश आश्रित ने कहा कि बैंकों का मर्जर (आपस में मिलाने) का प्रयास किया जा रहा है, जो गलत है। तीन लाख करोड़ रुपया बड़े घरानों बकाया है।
उसे छिपाने के लिए ही बैंकों को आपस में मिलाने की साजिश रची जा रही है। इसी का विरोध किया जा रहा है। अशोक सोनकर, शिशिर श्रीवास्तव, संजू यादव, अजय कुमार, शिप्रा श्रीवास्तव, विवेक दीक्षित, शकील अहमद, आरबी सिंह, सुशील कुमार, प्रवीण कुमार, दिवाकर आदि का कहना था कि उनकी मांगों पर विचार किया जाए, वरना इसका विरोध होता रहेगा। यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के जिला सचिव मो. अयाज का कहना है कि एक दिनी हड़ताल सफल रही। करीब पांच अरब का लेनदेन प्रभावित हुआ।