रायबरेली। बांदा, हमीरपुर, रायबरेली और फतेहपुर के लोकेटरों की सक्रियता से खनन विभाग के अफसर पस्त हैं। रायबरेली और लखनऊ के अधिकारियों की लोकेशन देकर आसानी से ओवरलोड वाहन पास कराए जा रहे हैं। डलमऊ और लालगंज कोतवाली में लोकेटरों के खिलाफ एफआईआर होने के बाद भी कार्रवाई के नाम पर तेजी नहीं दिख रही है।
खनन अधिकारी सुरेश लकड़ा की तहरीर पर बीती 22 सितंबर को डलमऊ कोतवाली में लोकेटर अनिल, अंशू, शुभम, शैलेंद्र, इमरान के खिलाफ ओवरलोड वाहनों को पास कराने की एफआईआर दर्ज की गई है। इसी तारीख को खनन निदेशालय लखनऊ से आई टीम को लालगंज में लोकेटरों ने कार्रवाई करने पर दौड़ा लिया था। मामले में एफआईआर दर्ज की गई है।
विभागीय जांच में पता चला है कि जिलों के करीब 50 लोकेटर सक्रिय हैं, जो अधिकारियों की लोकेशन देकर ओवरलोड वाहन पास कराते हैं। इसके एवज में लोकेटर वाहन मालिकों से रुपये लेते हैं। बांदा, हमीरपुर, फतेहपुर से मौरंग, सीमेंट भरे वाहनों का रायबरेली आना-जाना होता है। यह वाहन फतेहपुर से या डलमऊ होते हुए या फिर फतेहपुर से लालगंज होते हुए जिले के अंदर प्रवेश करते हैं। इससे डलमऊ, मुराईबाग और लालगंज कस्बे में इससे हर दिन जाम लगता है।
ऐसे काम करते हैं लोकेटर
लोकेशन ट्रैक करना : ये लोग चेकिंग टीमों, आरटीओ अधिकारियों या खनन विभाग के उड़नदस्तों की गाड़ियों के पीछे अपनी बाइक या कार लगा देते हैं। अधिकारी किस रूट पर चेकिंग कर रहे हैं, इसकी पल-पल की लाइव लोकेशन और तस्वीरें ''लोकेटर्स'' द्वारा बनाए गए गुप्त व्हाट्सएप ग्रुप में शेयर करते हैं। लोकेशन मिलते ही अवैध या ओवरलोड वाहनों के चालक अपना रास्ता बदल लेते हैं। रास्ता साफ होने पर इन्हें ग्रीन सिग्नल देकर 'पास' करा दिया जाता है।
खनन विभाग ने पुलिस को सौंपे दस्तावेज
खनन अधिकारी सुरेश लकड़ा और खनन निदेशालय की टीम मंगलवार को लालगंज कोतवाली पहुंची। सभी ने लालगंज कोतवाली में दर्ज कराई गई एफआईआर से संबंधित दस्तावेज सौंपे। अधिकारियोंं की टीम ने जांच कर सक्रिय लोकेटरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।