रायबरेली। पावर कॉर्पोरेशन के अभियंताओं की लापरवाही से छोटे ट्रांसफार्मरों के साथ अब बड़े ट्रांसफार्मर भी फुंकने लगे हैं। 15 दिन में लालगंज विद्युत वितरण खंड के अंतर्गत आने वाले दो विद्युत केंद्रों में लगे करीब 80 लाख रुपये कीमत के ट्रांसफार्मर फुंक गए हैं।
खास बात यह है कि दोनों उपकेंद्रों का निर्माण सात साल पहले कराया गया। एक जगह ट्रांसफार्मर तो बदल गया, लेकिन दूसरी जगह खराब हुए ट्रांसफार्मर की जांच पूरी नहीं हो पाई है। इससे उपभोक्ता बिजली संकट से जूझ रहे हैं। अभियंताओं के पास रटारटाया जवाब रहता है कि बिजली गिरने से ट्रांसफार्मर खराब होते हैं, जबकि हकीकत यह है कि बिजली से ट्रांसफार्मरों को बचाने के लिए कीमती उपकरण लगे होते हैं। इसके बाद ऐसी घटनाएं हो रही हैं।
हर तीन महीने में वितरण खंड टेस्ट डिवीजन के अभियंता ट्रांसफार्मरों व उपकरणों की जांच करते हैं। इससे साफ जाहिर है कि कहीं न कहीं तकनीकी खामियों की वजह से ट्रांसफार्मर खराब हो रहे हैं। जिले में पिछले तीन महीने में अलग-अलग क्षमता के 2500 ट्रांसफार्मर खराब हो चुके हैं। इन ट्रांसफार्मराें के खराब होने की वजह लो वोल्टेज बताई जा रही है।
15 दिन पहले लालगंज क्षेत्र के बेहटाकला विद्युत उपकेंद्र में लगा पांच एमवीए का ट्रांसफार्मर खराब हुआ था। तीन दिन पहले रनापुर विद्युत उपकेंद्र में भी ट्रांसफार्मर खराब हो गया। यहां लगे दो अन्य ट्रांसफार्मराें से बिजली आपूर्ति बहाल कराई जा रही है। उपभोक्ताओं लो वोल्टेज और ट्रिपिंग की समस्या से जूझ रहे हैं। इससे लोगों में आक्रोश है। विभाग कर्मियों ने बताया कि आकाशीय बिजली से ट्रांसफार्मर खराब होते है, तो उसके अंदर लगे क्वाइल, वायरिंग समेत अन्य उपकरण जल जाते हैं। ट्रांसफार्मर फट भी सकता है। सामान्य फॉल्ट आने पर ट्रांसफार्मर में ऐसी नौबत नहीं आती।
नहीं बांटा जाता बराबर लोड
शहर और ग्रामीण क्षेत्र में 25 केवीए से 400 केवीए तक के ट्रांसफार्मर हैं। शहर में ट्रांसफार्मरों से निकले एलटी के फेज में बराबर लोड तो रहता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादातर ट्रांसफार्मरों में सभी फेज पर लोड नहीं रहता है। कहीं-कहीं एक फेज पर पूरे गांव की आपूर्ति चलती है। इससे जहां लोगों को कम वोल्टेज मिलता है, वहीं ट्रांसफार्मर गर्म होकर खराब हो जाते हैं।
कीमती उपकरणों के बाद भी फुंक रहे ट्रांसफार्मर
जिला विद्युत उपभोक्ता फोरम के पूर्व सदस्य शरद मेहरोत्रा ने बताया कि उपकेंद्रों में लगे पॉवर ट्रांसफार्मरों को आकाशीय बिजली से बचाने के लिए कई उपकरण लगाए जाते हैं। जब बिजली गिरती है, तो पहले लाइटनिंग अरेस्टर खराब होता है। इसके अलावा ट्रांसफार्मर की सुरक्षा के लिए लगाए जाने वाले अन्य कई उपकरण भी खराब होते हैं।
इस वजह आकाशीय बिजली का असर ट्रांसफार्मर तक नहीं पहुंच पाता है। उपकेंद्र के ट्रांसफार्मरों और उपकरणों की टेस्टिंग हर तीन महीने में होनी चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होता। यही वजह है कि तकनीकी खामियां से ट्रांसफार्मर फुंक रहे हैं। इसके लिए कहीं न कहीं अभियंता जिम्मेदार हैं।
छंटनी के बाद से व्यवस्था चरमराई
आउटसोर्सिंग कर्मियों की छंटनी के बाद बिजली व्यवस्था चरमरा गई है। दिनभर कर्मियों को राजस्व वसूली में जुटाया जाता है। लाइनों के ऊपर आने वाली डालियों की छंटाई से फुरसत नहीं मिलती। फॉल्ट आने पर लाइन चलाने के लिए बार-बार ट्राई ली जाती है। इससे कहीं न कहीं उपकेंद्र में लगे उपकरणों पर असर पड़ता है। यही वजह है कि उपकेंद्र में लगे उपकरण खराब हो रहे हैं।
- डीके सिंह, निविदा संविदा कर्मचारी संघ
खराब ट्रांसफार्मर की हो रही जांच
बेहटाकला उपकेंद्र में लगा ट्रांसफार्मर दो बार बिजली गिरने से खराब हुआ था। रनापुर उपकेंद्र में ट्रांसफार्मर में आई खामी की जांच की जा रही है। जांच के बाद पता चलेगा कि ट्रांसफार्मर सही है या खराब। यही नहीं किस वजह से खराब हुआ, इसका भी पता जांच के बाद चलेगा।
-मुकेश कुमार, अधीक्षण अभियंता विद्युत वितरण मंड द्वितीय