रायबरेली। आंटी नौगवां की रहने वाली किरन यादव साधन सहकारी समिति खुरहेटी गोंदवारा में यूरिया लेने पहुंची थीं। चार घंटे लाइन में लगने के बाद भी खाद न मिलने पर उनका चेहरा गुस्से से लाल था। बताती हैं कि वह आठ बीघे की किसान हैं। बुधवार सुबह आठ बजे खाद लेने के लिए समिति आई थीं। सचिव कभी पीओएस मशीन खराब बताते हैं तो कभी सर्वर न होने की बात कहते हैं। बाद में खाद की कालाबाजारी कर ली जाती है। खाद न मिलने से धान की फसल बर्बाद हो रही है।
यह दर्द सिर्फ किरन नहीं, बल्कि पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में समिति में पहुंचने वाली अन्य महिला किसानों का है, जिन्हेंं एक बोरी खाद के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है। महिलाओं का कहना है कि वह चूल्हा चौक छोड़कर खाद के लिए समिति के चक्कर लगा रही हैं।
अफसर भले ही भरपूर खाद होने का दावा करें, लेकिन जिले की 160 साधन सहकारी समितियों में यूरिया के लिए कुछ इसी तरह की मारामारी दिख रही है। किसान समितियों को पहुंच रहे हैं, लेकिन खाद न मिलने से उन्हें मायूसी हाथ लग रही है। खाद न मिलने के कारण किसानों ने साधन सहकारी समिति खुरहेटी गोंदवारा में नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। भोलू का पुरवा गांव के दिव्यांग किसान भानू प्रताप बताते हैं कि घंटों इंतजार के बाद भी खाद नहीं मिली है।
ऊंचाहार ब्लॉक क्षेत्र में सहकारी संघ ऊंचाहार, सहकारी समिति खरौली, सवैया हसन, खुर्रमपुर व सलीमपुर भैरों में खाद नहीं है। बछरावां ब्लॉक क्षेत्र के कसरावां, राजामऊ, नीमटीकर, इचौली समेत 11 साधन सहकारी समितियों में खाद नदारद है। किसान महेश, ओमनारायण, मनोज मिश्रा, ज्ञानचंद कहते हैं कि खाद न मिलने से फसल बर्बाद हो रही है। सतांव प्रतिनिधि के मुताबिक ब्लॉक क्षेत्र की आठ साधन सहकारी समितियों में खाद नहीं है। इससे किसान बेहाल हैं।
खाद की हो रही कालाबाजारी
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राजकीय कॉलोनी स्थित पीसीएफ गोदाम पर सुबह करीब 10 बजे एक कार पर खाद रखी जा रही थी। अमर उजाला की टीम पहुंची तो कार पर खाद रखने वाले घबरा गए। फोटो खींचने के डर से लोगों ने कार में रखी खाद को गोदाम के बाहर फेंक दिया और चले गए। इस बाबत वहां पर मौजूद स्टाफ ने कुछ भी बोलने से इन्कार किया। इससे जाहिर है कि किस तरह खाद की कालाबाजारी की जा रही है।
खाद की कमी नहीं : अखिलेश
जिला कृषि अधिकारी अखिलेश पांडेय के मुताबिक 9193 मीट्रिक टन यूरिया निजी केंद्रों व सहकारी बिक्री केंद्रों पर उपलब्ध है। चालू खरीफ सीजन में एक अप्रैल से 18 अगस्त तक 45 हजार 132 मीट्रिक टन यूरिया की बिक्री हुई है। खाद गोदाम में उपलब्ध है। साधन सहकारी समितियों में खाद भेजी जा रही है। जल्द ही यूरिया की और रैक जिले आने वाली है।