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72 अस्पतालों को 20 करोड़ की दरकार, तगादेदारों से अधीक्षक घबराए

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रायबरेली। जिले के सरकारी अस्पतालों के रखरखाव, प्रसूताओं व अन्य मरीजों को भोजन, वाहनों सहित अन्य योजनाओं के लिए शासन से करीब नौ माह से बजट नहीं मिल पा रहा है। करीब 20 करोड़ की देनदारी बाकी है, लेकिन बजट न मिल पाने के कारण मरीजों के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। अस्पतालों में लगे करीब 56 वाहनों के चक्के भी जाम होने वाले हैं।
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जिला अस्पताल, पीएचसी और सीएचसी सहित 72 अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित हो गई हैं। बजट के अभाव में अस्पतालों के जनरेटर तक नहीं चल पा रहे हैं। काम के बाद भुगतान मांगने वालों की संख्या बढ़ने के बाद अधीक्षक भी अब हाथ खड़े कर रहे हैं। जिले में दो जिला अस्पताल, 19 सीएचसी और 51 पीएचसी को हर साल करोड़ों का बजट मिलता है।
इसमें करीब दो करोड़ रुपये से अधिक का बजट रोगी कल्याण समिति के माध्यम से अस्पतालों में आने वाले मरीजों की सुविधा की व्यवस्था के लिए मिलता है। इस बजट से अस्पताल की रंगाई-पुताई, कुर्सी-मेज, पेयजल, परिसर में साफ-सफाई आदि बंदोबस्त किए जाते हैं। पिछले साल सितंबर माह से पहले एक करोड़ रुपये मिलने के बाद अब तक दूसरी किस्त नहीं दी गई है। बजट मिलने की आस में अधीक्षकों ने अस्पतालों में काम तो करवा दिया, लेकिन अब बजट न मिलने के कारण ठेकेदार तगादा कर रहे हैं।
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प्रसूताओं को नाश्ता व भोजन भी मुहैया कराया जा रहा है। नौ माह में ठेकेदार ने 25 लाख से अधिक का भोजना खिला दिया, लेकिन शासन से बजट न मिलने के कारण अब भोजन का भी संकट खड़ा गया है। किसी तरह ठेकेदार से भोजन की व्यवस्था कराई जा रही है। आरबीएसके, टीकाकरण और कोरोना जांच सहित अन्य कार्यों के लिए अस्पतालों में 56 गाड़ियां भी लगाई गई है। करीब डेढ़ करोड़ का भुगतान फंसने के बाद ठेकेदार वाहनों को बंद करने की चेतावनी दे चुके हैं। इसके अलावा अन्य योजनाओं का भी करोड़ों रुपये का भुगतान फंस गया है।
बजट न मिल पाने के कारण भुगतान नहीं हो पा रहा है। सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने बताया कि शासन से बजट की समस्या है। रोगी कल्याण समित को दूसरी किस्त का बजट नहीं मिला। भोजन, वाहन सहित अन्य योजनाओं में भी बजट न मिलने के कारण समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। ठेकेदार काम बंद करने का दबाव बना रहे हैं। भुगतान का आश्वासन देकर काम चलाया जा रहा है।
जननी सुरक्षा योजना के तहत भुगतान भी राम भरोसे चल रहा है। 31 मार्च को विभिन्न मदों से सरेंडर किए गए बजट के सहारे जेएसवाई के तहत भुगतान किया जा रहा है। जल्द ही बजट न मिलने से जेएसवाई का भुगतान भी ठप हो सकता है। आशा बहुओं का भुगतान भी काफी बाकी है। इसके लिए भी बजट का इंतजार किया जा रहा है। संविदा स्टाफ के वेतन के लिए भी सूची मांगी गई है। जल्द ही भुगतान मिल सकता है।
स्वास्थ्य विभाग में विभिन्न योजनाओं, कार्यक्रमों के संचालन और वेतन आदि के लिए पिछले साल 122 करोड़ का बजट जिले को मिलना था, लेकिन शासन से मात्र 65 करोड़ का ही बजट मिल सका था। पर्याप्त बजट न मिल पाने के कारण अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित हो गई हैं। पीने के पानी के साथ ही अन्य सुविधाएं प्रभावित हो गई हैं। हालांकि इसका खामियाजा मरीजों को ही भोगना पड़ रहा है।
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