रायबरेली। राजनीति विज्ञान अध्ययन एवं शोध संस्थान की ओर से शुक्रवार को क्रांतिपुरी में धर्म राजनीति और नैतिकता के संबंधों पर परिसंवाद का आयोजन हुआ। संस्थान के अध्यक्ष डॉ. राम बहादुर वर्मा ने कहा कि राजनीति को नैतिकता से जोड़ना राजनीति को स्वच्छ बनाने के लिए जरूरी है। धर्म के जुड़ने पर राजनीति और धर्म दोनों पथ भ्रष्ट हो जाते हैं। राजनीति और धर्म के क्षेत्र अलग-अलग हैं।
उन्होंने कहा कि राजनीति में धर्म के प्रवेश ने समाज में सांप्रदायिकता का जहर घोलने से देश की एकता एवं शांति के लिए खतरा पैदा हो गया है। नैतिकता विहीन राजनीति धन कमाने, सत्ता पाने के लिए, दल बदल और निष्ठा बदल, एक-दूसरे पर घृणित आरोप लगाने का हथियार बन गई है। नेताओं की जुबान पर काबू नहीं रह गया है। जेन-जी एवं अल्फा पीढ़ी राजनीतिक जीवन में नैतिक मूल्यों की स्थापना करना चाहती है तथा धर्म को राजनीति से अलग रखना चाहती है। यह एक स्वागत योग्य कदम है।
महामंत्री डॉ. बृज किशोर ने कहा कि गांधीजी राजनीति में धर्म के प्रवेश के पक्षधर थे, पर धर्म से उनका आशय किसी विशेष धर्म से नहीं, वरन नैतिकता से था। वह राजनीति में नैतिक मूल्यों के सबसे बड़े पक्षधर थे। डॉ. मनोज चौधरी ने कहा कि नैतिकता विहीन राजनीति के कारण देश में चरित्र का संकट पैदा हो गया है। युवा पीढ़ी में असंतोष एवं आक्रोश फैल गया है। इसे दूर करने के लिए राजनीति को सही रास्ते पर लाना होगा। इस मौके पर रामदीन विश्वकर्मा, शरद चौधरी, शैलेश प्रकाश, रामनरेश वर्मा, जितेंद्र सिंह, राकेश कुमार मौजूद रहे।