रायबरेली। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका स्कूलों में छात्राओं के भोजन, स्टेशनरी और इलाज के नाम पर 63 लाख रुपयों के घपले की आशंका पर शासन ने जांच के आदेश दिए हैं। पोर्टल पर छात्राओं की उपस्थिति दर्ज न होने के बाद भी 47 दिन में बड़ी रकम के भुगतान पर कइयों की गर्दन फंसने की उम्मीद है। मंगलवार को अपर निदेशक बेसिक शिक्षा पीएन सिंह ने जांच शुरू कर दी है। उन्होंने कस्तूरबा गांधी स्कूल हरचंदपुर सहित कई स्कूलों में अभिलेखों को खंगाला। सूत्रों का कहना है कि अभिलेखों में उन्हें बड़ी गड़बड़ियां मिली है। कई जरूरी अभिलेखों को उन्होंने कब्जे में ले लिए। जांच शुरू होने के बाद अधिकारियों में हड़कंप मच गया है।
जिले में संचालित 16 कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में 13 फरवरी से मार्च तक कुल 47 दिन में 63 लाख रुपये छात्राओं के भोजन, स्टेशनरी और मेडिकल में खर्च कर दिए गए। राज्य परियोजना कार्यालय में मामले को पकड़ा है। भोजन, मेडिकल केयर, स्टेशनरी एवं शिक्षण सामग्री के नाम पर 63 लाख रुपये खर्च कर दिए गए, लेकिन प्रेरणा पोर्टल पर छात्राओं की उपस्थिति दर्ज नहीं की गई। आशंका है बेसिक शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों और वार्डनों ने साठगांठ करके बड़ी रकम का व्यारा-न्यारा कर दिया।
जांच में अपर निदेशक ने पाया कि 13 अप्रैल को बच्चों के जाने के बाद उपस्थित पंजिका के अभिलेख अपूर्ण हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि ऐसा नहीं चलेगा और चालान पर दिनांक एवं संख्या होनी चाहिए। उन्होंने वार्डन व अन्य स्टाफ के पूछताछ की। उन्होंने कई और स्कूलों में पहुंचकर जांच की है। प्रथम दृष्टया बड़े पैमाने पर गड़बड़झाला पकड़ में आने के बाद अधिकारियों में हड़कंप मच गया है। बीएसए आनंद प्रकाश शर्मा का कहना है कि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी नहीं की गई है।
जिले के कस्तूरबा गांधी स्कूलों की छात्राओं की उपस्थिति पोर्टल पर उपलब्ध नहीं है, लेकिन उनके भोजन, स्टेशनरी और मेडिकल के नाम पर 63 लाख खर्च किए गए हैं। प्रथम दृष्टया सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला पकड़ में आने के बाद राज्य परियोजना से जांच मिली है। स्कूलों में पहुंचकर दस्तावेजों की जांच की जा रही है। अभिलेख पूर्ण नहीं मिल रहे हैं। जल्द ही जांच पूरी की जाएगी। - पीएन सिंह, अपर निदेशक (बेसिक शिक्षा)