जिरायबरेली। जिला अस्पताल की इमरजेंसी कक्ष में तैनात ईएमओ और फार्मासिस्ट के साथ रविवार की रात न सिर्फ अभद्रता की गई, बल्कि विरोध करने पर देख लेने की धमकी दी गई। करणी सेना के जिलाध्यक्ष और उनके साथियों की दबंगई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो हड़कंप मच गया। कहा जा रहा है कि करणी सेना के जिलाध्यक्ष एक मरीज को दिखाने अस्पताल पहुंचे थे तभी विवाद हुआ। पुलिस ने पहुंचकर घटना की जांच की। साथ ही मामले में केस भी दर्ज कर लिया गया है।
रात करीब 10 बजे अस्पताल की इमरजेंसी कक्ष में ईएमओ डॉ.संतोष सिंह और एक फार्मासिस्ट ड्यूूटी पर थे। इसी दौरान करणी सेना के जिलाध्यक्ष मोनू सिंह अपने साथियों के साथ पहुंचे। एक मरीज के इलाज को लेकर जिलाध्यक्ष और ईएमओ के बीच बहस हो गई। इस पर मोनू ने ईएमओ के साथ ही फार्मासिस्ट से अभद्र व्यवहार किया। यहां तक ईएमओ को चुप रहने की धमकी दी। ईएमओ का आरोप है कि करणी सेना के जिलाध्यक्ष अपने साथियों के संग पहुंचे और अभद्र व्यवहार करते हुए जानमाल की धमकी दी। सीओ सदर वंदना सिंह ने बताया कि ईएमओ की तहरीर पर करणी सेना जिलाध्यक्ष और उनके अज्ञात समर्थकों के खिलाफ स्वास्थ्य कर्मियों से अभद्र व्यवहार करने, देख लेने की धमकी देने का मामला दर्ज कर लिया गया है। जांच के बाद प्रकरण में कार्रवाई होगी।
इमरजेंसी में लिखी जा रही बाहर की दवाएं, इलाज नहीं होता
करणी सेना के संरक्षक रमेश सिंह की अगुवाई में समर्थक सोमवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को पत्र देकर जिला अस्पताल में तैनात ईएमओ और फार्मासिस्ट के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। संरक्षक ने बताया कि रविवार की रात करणी सेना के जिलाध्यक्ष के गांव का एक युवक चोट खा गया था। युवक का ढाई घंटे बाद भी अस्पताल में इलाज नहीं हो सका। इसकी सूचना मिलने पर जिलाध्यक्ष ने पहुंचकर युवक का इलाज करने की बात कही थी। उन पर झूठा आरोप लगाकर केस दर्ज कराया गया। मुकदमा तत्काल वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि इमरजेंसी कक्ष में बाहर की दवाएं मरीजों को लिखी जाती हैं। वहां पर भ्रष्टाचार चरम पर है। इसकी आवाज उठाने वालों पर स्वास्थ्य कर्मी फर्जी आरोप लगाते हैं। भ्रष्टाचार की जांच होनी चाहिए। डीएम ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने का भरोसा दिया है।