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पहले भी हादसों का शिकार हो चुके हैं इग्रुआ के प्रशिक्षु विमान

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रायबरेली। आजमगढ़ में प्रशिक्षु विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की यह कोई पहली घटना नहीं है। इसके पहले भी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी के प्रशिक्षु विमान हादसों का शिकार हो चुके हैं। आजमगढ़ की तरह महाराष्ट्र के गोंदिया में हुए एक हादसे में भी प्रशिक्षु पायलट की मौत हो चुकी है, जबकि अन्य हादसों में ट्रेनी पायलटों ने कूदकर अपनी जान बचा ली थी। सभी हादसों में प्रशिक्षु विमान पूरी तरह तहस-नहस हो गये।
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इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (इग्रुआ) की स्थापना तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने 1985 में की थी। यह रायबरेली-सुल्तानपुर राजमार्ग पर फुरसतगंज में स्थित है। इग्रुआ के प्रशिक्षु विमानों के दुर्घटनाग्रस्त होने की घटनाओं का जिक्र करें तो पिछले डेढ़ दशक में कई हादसे हुए हैं। इनमें अब तक दो प्रशिक्षु पायलटों की मौत हो चुकी है। इग्रुआ के सूत्रों की मानें तो 12-13 साल पहले इसी जिले के भदोखर थाना क्षेत्र में भांव के निकट एक प्रशिक्षु विमान हाईटेंशन बिजली के तारों में उलझ गया था, जिसका काफी हिस्सा जलकर नष्ट हो गया था तो बाकी हिस्सा काफी दूर बाद टूटकर गिरा था।
गनीमत रही कि प्रशिक्षु पायलट की जान बच गई थी। जिस तरह आजमगढ़ जिले में प्रशिक्षु विमान और उसके ट्रेनी पायलट के साथ सोमवार को हादसा हुआ है, उसी तरह का एक हादसा महाराष्ट्र के गोंदिया में भी हो चुका है। तब प्रशिक्षु पायलट सोहेल अंसारी सोलो क्रॉस कंट्री उड़ान पर निकला था, जिसका विमान पहाड़ियों से टकरा गया था। हादसे में प्रशिक्षु पायलट की मौत हो गई थी। प्रशिक्षण के दौरान इग्रुआ के रनवे पर भी कुछ हादसे हुए।
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एक महिला प्रशिक्षु पायलट प्रशिक्षण ले रही थी। रनवे पर उतरते समय पहिया न खुलने की वजह से प्रशिक्षु विमान काफी दूर तक रगड़ता चला गया था। इस हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ था। इसी तरह रनवे पर उतरते समय एक प्रशिक्षु विमान उछल कर बगल में बने नाले में गिर गया था और उसमें आग लग गई थी। इस हादसे में प्रशिक्षु पायलट ने कूदकर जान बचाई थी।
इग्रुआ के मीडिया प्रभारी रामकिशोर द्विवेदी बताते हैं कि प्रशिक्षण के लिए जो भी विमान उपयोग में लाए जाते हैं, उनका परीक्षण डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (डीजीसीए) से कराया जाता है। इसके बाद प्रशिक्षु विमान में उड़ान भरते हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी (इग्रुआ) के जिस प्रशिक्षु पायलट की सोमवार को आजमगढ़ में विमान क्रैश होने से मौत हो गई, वह तीन बहनों में इकलौता भाई था।
पिता एयर इंडिया में कार्यरत थे। हादसे की खबर लगते ही इग्रुआ में शोक की लहर दौड़ गई। पूरे परिसर में सन्नाटा छाया हुआ है। हर कोई प्रशिक्षु पायलट की मौत से दुखी है। अमेठी जिले के फुरसतगंज में स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी का एक प्रशिक्षु विमान आजमगढ़ जिले में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान क्रैश हो जाने से इसे उड़ा रहे पायलट कोणार्क शरन की मौत हो गई।
कोणार्क ने सोमवार सुबह लगभग 10.20 बजे इग्रुआ के रनवे से टीबी-20 प्रशिक्षु विमान से क्रॉस कंट्री सोलो प्रशिक्षण के लिए उड़ान भरी थी। करीब एक घंटे बाद ही लगभाग 11.30 बजे कोणार्क का प्रशिक्षु विमान आजमगढ़ जिले में क्रैश हो गया। हादसा इतना जबरदस्त था कि विमान के परखच्चे उड़ गये और प्रशिक्षु पायलट कोणार्क शरन की मौत हो गई।
इग्रुआ के मीडिया प्रभारी रामकिशोर द्विवेदी की माने तो प्रथम दृष्टया यह घटना मौसम की खराबी के कारण हुई है। कोर्णाक शरन ने इग्रुआ में करीब तीन साल पहले यानी सितंबर 2017 में प्रवेश लिया था और प्रशिक्षण के 125 घंटे पूर्ण कर चुका था। प्रशिक्षु पायलट की उम्र 21 वर्ष थी और वह हरियाणा प्रांत के पलवल के आदर्श नगर का रहने वाला था।
इग्रुआ के मीडिया प्रभारी बताते हैं कि कोणार्क शरन के पिता रामशरन एयर इंडिया में कार्यरत थे, जो रिटायर हो चुके हैं। वह तीन बहनों में इकलौता भाई था। किसी को उम्मीद नहीं थी कि इतना दर्दनाक हादसा हो जाएगा। इस दुखद हादसे से संस्थान में शोक छाया हुआ है। कोणार्क काफी होनहार था। हंसमुख और मिलनसार होने से साथी प्रशिक्षु पायलट ही नहीं, बल्कि पूरा संस्थान दुखी है।
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