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मेरी किस्मत अच्छी थी कि मैं बार्डर पार कर गई......

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रायबरेली। ...पूरे यूक्रेन में दहशत व डर का माहौल है। कीव व उससे सटे इलाकों में लगातार बमबारी हो रही है। पूरे यूक्रेन में सभी दुकानें बंद हैं। खाने-पीने की चीजेें खत्म हो गईं हैं।
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पानी तक के लिए तरशना पड़ रहा है। वीरानी सी छाई है। हम लोग कीव के मुख्य युद्ध क्षेत्र से दूर थे। कॉलेज के प्रोफेसर आश्वासन दे रहे थे कि कुछ नहीं होगा।
आप सब लोग अपने देश सुरक्षित पहुंच जाओगे। लेकिन फिर भी सब ईश्वर से सकुशल घर पहुंचने के लिए दुआएं कर रहे थे। हमने हिम्मत नहीं हारी। खुद के पैसों से हम लोगों ने एक बस ली और उसी से रोमानिया बॉर्डर की तरफ निकले। जगह-जगह हवाई हमलों के कारण सड़क पर गाड़ियां जल रहीं थीं।
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सड़कें भी क्षतिग्रस्त हो चुकी थीं। तहस-नहस हुईं गाड़ियों के कारण सड़कें भी बंद हो गईं थीं। इस वजह से हाईवे पर लंबा जाम है। रोमानिया बार्डर जब करीब 12 किमी. दूर रह गया तो हम लोगों को पैदल चलना पड़ा।
ठंडी रातों में पैदल ही बॉर्डर पहुंचे। लेकिन मुसीबतें फिर भी कम नहीं हुईं। वहां पर सेना के जवान बॉर्डर पार नहीं होने दे रहे थे। भारतीय छात्रों की काफी भीड़ यहां जमा थी।
हर कोई पहले बॉर्डर पार करने के लिए जद्दोजहद कर रहा था। मम्मी-पापा व रिश्तेदारों की दुअएं काम आईं और धक्कामुक्की होने लगी।
इसी आपाधापी में हम कब यूक्रेन से रोमानिया देश की सीमा में दाखिल हो गए पता ही नहीं चला। बुधवार को यूक्रेन से सकुशल लौटीं मेडिकल की छात्रा निहारिका पटेल का गला वहां के हालात बयां करते हुए भर आता है।
शहर के अमरीशपुरी कॉलोनी निवासी निहारिका पटेल यूूक्रेन के टर्नोपिल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की सेकेंड ईयर की छात्रा हैं। निहारिका पटेल ने बातचीत में बताया कि 24 फरवरी को जब युद्ध शुरू हुआ तो उन्हें पता नहीं था कि मामला इतना बिगड़ जाएगा।
यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और सोशल मीडिया के जरिए उन्हें जानकारी हुई। कॉलेज के प्रोफेसर ने बताया कि युद्ध का अधिक प्रभाव यूक्रेन की राजधानी कीव और खारकीव शहर में है, जो यूूक्रेन के पूर्वी इलाके हैं।
निहारिका ने बताया कि यूूक्रेन में भारतीय दूतावास से संपर्क किया तो उन्होंने कुछ दिन इंतजार करने की बात कही। इधर, युद्ध और तेज हो गया था। दोस्तों के साथ खुद के खर्चे पर एक बस की और रोमानिया बार्डर की तरफ निकल पड़े। 12 किमी. पैदल चलना पड़ा। बॉर्डर पर सेना अंदर नहीं जाने दे रही थी।
रोमानिया पहुंचने पर भारतीय दूतावास के अधिकारी अपने साथ ले गए। इसके बाद वहां से एयर इंडिया की फ्लाइट से दिल्ली भेज दिया गया।
दिल्ली से सड़क के रास्ते निहारिका बुधवार को अपने घर पहुंचीं तो पिता अरविंद किशोर और मां पार्वती देवी की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। बेटी के सकुुशल पहुुंचने पर खुशी जताई। निहारिका के यहां पहुंचने पर अफसरों ने भी स्वागत किया।
यूक्रेन से सकुशल तीन अन्य छात्र पहुंचे दूसरे देश
सलोन (रायबरेली)। क्षेत्र के रहने वाले तीन मेडिकल छात्र यूूक्रेन छोड़कर दूसरे देशों में पहुंच गए हैं। ऐेेसे में वह जल्द अपने घरों को पहुंचेंगे। इस खबर पर छात्रों के माता-पिता ने खुशी जताई है।
फोन पर हुई बातचीत में श्रुति रस्तोगी ने बताया कि वह मंगलवार को कीव शहर को छोड़कर 11 घंटे की लंबी यात्रा कर स्लोवाकिया बॉर्डर पर पहुंच गईं। बताया कि भारतीय बच्चों का समूह कैंप में रुका है।
श्रुुति ने माता-पिता को बताया कि गुरुवार शाम या फिर शुक्रवार सुबह हम लोगों को भारत ले जाया जाएगा। मां रचना रस्तोगी ने बताया कि कीव शहर छोड़ने के बाद ट्रेन में वहां के यूक्रेनी नागरिक भारतीयों को घुसने तक नहीं दे रहे थे। वह धक्का देकर के बाहर निकाल रहे थे। इन लोगों का सारा बैग खाने-पीने का सामान सब फेंक दिया गया।
ट्रेन में धक्का-मुक्की में कई बच्चों को चोटें भी आईं। श्रुति के पैर में भी चोट आई हैं। ओजार्ड से बस से स्लोवाकिया देश पहुंचे। 13-13 बच्चों के ग्रुप बनाए गए हैं। जो बच्चे पहले से हैं, उनको पहले भेजा जा रहा है। इसके बाद इन लोगों का नंबर आएगा।
सलोन कस्बे के रहने वाले अंशदीप भी यूक्रेन के लवीव में फंसे थे, जो बुधवार को बस से हंगरी देश के शरणार्थी कैंप में पहुंच गए हैं। अंशदीप के पिता गुरुचरन सिंह उर्फ राजू सरदार ने बताया कि आज सुबह अंशदीप ने मैसेज कर बताया था और बस की फोटो भी भेजे थे कि हम लोग बस द्वारा हंगरी जा रहे हैं, जहां शरण कैंप में रहेंगे। वहां से जब भारत के लिए फ्लाइट आएगी, तब हम भारत आएंगे।
इस सूचना के बाद अंशदीप की मां दलजीत कौर और गुरुचरन सिंह के चेहरे पर खुशी आ गई, लेकिन सभी बेटे के घर आने का इंतजार कर रहे हैं। कस्बे के ही असद कुरेशी चार साल से यूक्रेन में रहकर मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे। वह भी यूक्रेन से सकुशल सुरक्षित रोमानिया के शरण कैंप में पहुंच गए हैं।
पिता असलम कुरैशी ने बताया कि बुधवार रात असद फ्लाइट से रोमानिया से भारत के लिए चलेगा। वह सुरक्षित है। इससे हमें खुुशी है। असद की मां सरवरी बानो ने कहा कि जब वह सुरक्षित घर लौट आएगा, तब बड़ी खुशी मिलेगी।
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