बेहोशी के पांच डॉक्टर फिर भी हरदोई का सहारा
हरदोई जिले में मूल रूप से तैनात एनेस्थेटिस्ट डॉ. सत्येंद्र कुमार गौतम वर्तमान समय में जिला अस्पताल रायबरेली से संबद्ध हैं। शासन स्तर पर प्रयास करके उन्होंने यहां अपनी संबद्धता करवा ली है। जिले में पांच से अधिक बेहोशी के डॉक्टर उपलब्ध होने के बाद भी हरदोई के डॉक्टर यहां काम कर रहे हैं।
केस दो
फिजीशियन कम बता काम कर रहे उन्नाव के डॉक्टर
जिला अस्पताल से फिजीशियन डॉ. अशोक कुमार को संबद्ध किया गया है। उनकी मूल तैनाती भी उन्नाव जिले में है। बहाना करके उन्हें यहां संबद्ध रखा गया कि जिले में फिजीशियन की कमी है। हालांकि आदेश के आने के बाद चिकित्सक की संबद्धता को बहाल रखने का पूरा प्रयास किया जा रहा है।
केस तीन
कोविड अस्पताल के डॉक्टर को एडी ने किया संबद्ध
जिले की खजूरगांव सीएचसी को कोविड अस्पताल भी बनाया गया है। जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञों की संख्या चार से अधिक होने के बाद भी अपर निदेशक ने खजूरगांव के डॉ. एमपी सिंह को यहां से संबद्ध कर दिया गया है। चर्चा तो यहां तक है कि वे बाहर ज्यादा समय निजी प्रैक्टिस में ही दे रहे हैं।
रायबरेली। जिले में तकरीबन 80 डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी कहीं न कहीं संबद्धता के सहारे मौज उड़ा रहे हैं। ये मामले तो महज बानगी भर हैं। अकेले जिला अस्पताल से उन्नाव और हरदोई के चिकित्सकों सहित आठ डॉक्टरों को संबद्ध हैं।
यहां तक कि सीएमओ कार्यालय से संबद्ध एक एचईओ बिना काम के ही वेतन ले रहा है। मुख्यमंत्री के संबद्धता को खत्म करने के आदेश के बाद मौज कर रहे डॉक्टरों व अन्य स्टाफ में हड़कंप मच गया है। संबद्धता को कायम रहने के बाद चिकित्सक जुगाड़ में जुट गए हैं।
जिले की जगतपुर, रोहनियां, गौरा आदि सीएचसी में डॉक्टरों की बेहद कमी है, लेकिन यहां कि चिकित्सकों को भी कहीं न कहीं संबद्ध किया गया है। जगतपुर में तैनात डॉ. अतुल पांडेय, लालगंज में तैनात डॉ. जयंत सिंह, सरेनी में तैनात राशिदा प्रवीन, लालगंज में तैनात प्रमिला को जिला अस्पताल से संबद्ध किया गया है। एचईओ अनिल पांडेय सीएमओ कार्यालय में काम कर रहे हैं। अब संबद्धता को लेकर शान के गंभीर होने के बाद हडक़ंप मच गया है।
पीएचसी व न्यू पीएचसी में भी नहीं पहुंच रहे चिकित्सक
जिले में 50 से अधिक पीएचसी व न्यू पीएचसी संचालित हैं, लेकिन यहां भी डॉक्टर इलाज करने के लिए नहीं पहुंच रहे हैं। पीएचसी पर तैनात कई डॉक्टरों को दूसरे अस्पतालों से संबद्ध कर दिया गया है। ऐसे में अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचने वाले रोगियों को भटकना पड़ रहा है। कई डॉक्टर तो लखनऊ व अन्य शहरों में रहकर ड्यूटी कर रहे हैं।
जिले में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। शासन से संबद्धता खत्म किए जाने के संबंध में हुए आदेश का अनुपालन कराया जा रहा है। जिले स्तर से ज्यादा डॉक्टरों को संबद्ध नहीं किया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ