रायबरेली। बांग्लादेशी, रोहिंग्या व संदिग्ध पाकिस्तानी घुसपैठियों को भारतीय नागरिकता दिलाने की साजिश पर केंद्रीय गृह मंत्रालय की नजर है। जांच में साजिश के विफल होने के बाद जिले के सलोन ब्लॉक के गांवों में बने 52 हजार फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों के संबंध में मंत्रालय ने रिपोर्ट तलब की है।
गृह मंत्रालय के महारजिस्ट्रार ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) व पुलिस की जांच आख्या के साथ ही अब तक निरस्त किए गए प्रमाणपत्रों की सूचना मांगी है। इसके बाद पाकिस्तान सीमा से जुडे़ राज्यों गुजरात, पंजाब और राजस्थान के पते से बने प्रमाणपत्रों के दुरुपयोग को रोका जा सके।
जुलाई 2024 में एनआईए के हस्तक्षेप के बाद हुई जांच में प्रांत के प्लाट-39 ठाकुर विकेंद्र नगर जोधपुर के पते पर हैदर व लुधियाना के अली के नाम भी फर्जी प्रमाणपत्र पकड़ में आए। लखनऊ के स्थायी पते पर भी करीब पांच हजार जाली प्रमाणपत्र बनाए गए। महारजिस्ट्रार के आदेश पर निदेशक (राष्ट्रीय कार्यक्रम) डॉ. शुभा मिश्रा ने सीएमओ को पूरी रिपोर्ट तैयार करने के आदेश दिए हैं।
ऐसे खुला मामला
आरोपी ग्राम विकास अधिकारी विजय यादव की आईडी व पासवर्ड से सलोन ब्लॉक के नुरुद्दीनपुर, पाल्हीपुर, दुबहन, औनानीश, पृथ्वीपुर, माधौपुर निनैया समेत 12 ग्राम पंचायतों में 52, 846 से अधिक फर्जी जन्म प्रमाणपत्र बनाए गए। इस बीच मुंबई में कांदिवली पुलिस अली हसन शेख व मुमताज शेख के फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों को पासपोर्ट बनवाने के दौरान पकड़ा। बांग्लादेशी जाकिर का जन्म प्रमाणपत्र भी रायबरेली से ही बनाया गया था। इसपर एनआईए ने जांच शुरू की और धीरे-धीरे पूरा मामला खुलता गया।
सलोन के 12 गांवों में बनाए गए 52 हजार से अधिक फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों के मामले में गृह मंत्रालय के महारजिस्ट्रार ने रिपोर्ट मांगी है। मामले में डीपीआरओ और पुलिस को पत्र भेजा गया है। जल्द ही रिपोर्ट भेज दी जाएगी। फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों को निरस्त करने का काम चल रहा है।
डॉ. नवीनचंद्रा, सीएमओ रायबरेली