गौरतलब है कि वर्ष 2012-13 में फर्जी शासनादेश पर राज्य सहकारी निर्माण एवं विकास संघ लिमिटेड को सपा के विधायकों ने एक करोड़ 34 लाख रुपये के काम दिए थे।
शिकायत होने पर लोकायुक्त कार्यालय के मुख्य इंवेस्टीगेशन ऑफीसर प्रसून कुमार व अशोक कुमार ने पड़ताल की थी। 19 जुलाई 2013 को लोकायुक्त कार्यालय ने शासन को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए संस्तुति कर दी थी।
लोकायुक्त की जांच के खिलाफ तत्कालीन तकनीकी अन्वेषक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। बीती पांच जून को लखनऊ हाईकोर्ट के तकनीकी अन्वेषक की याचिका को खारिज कर दिया था। मास्टर माइंड ने इस आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में न्यायाधीश श्रीनारायण शुक्ला व प्रत्यूश कुमार के कोर्ट में स्पेशल अपील दायर की।
कोर्ट ने मामले को सुनने के बाद स्पेशल अपील को खारिज करते हुए लोकायुक्त की जांच को सही करार दे दिया है। अब घोटाले के आरोपी व तकनीकी अन्वेषक अरुण शुक्ला के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। शासन से निर्देश मिलने के बाद कार्रवाई होगी।