रायबरेली। कोरोना की पहली लहर में सुरक्षा उपकरणों और दवाओं की खरीद में भी घालमेल हुआ। सांसद सोनिया गांधी की निधि से मिले 1.32 करोड़ रुपये से यह खरीदारी हुई थी।
स्वास्थ्य विभाग के अफसरों ने दोगुने से अधिक रेट के अंतर से कोरोना से बचाव के उपकरण और सामग्रियां खरीदीं। कोरोना काल के दौरान डेढ़ माह के अंदर ही उपकरणों की कई बार खरीद हुई। हर बार रेट में बड़ा अंतर मिला।
स्वास्थ्य विभाग से खर्च का ब्योरा डीआरडीए पहुंचने के बाद मनमानी की कलई खुल गई। मामले में डीआरडीए के परियोजना निदेशक ने सांसद निधि से खरीदारी की पूरी रिपोर्ट तलब की है।
जिले में मार्च 2020 से कोरोना का कहर शुरू हो गया था। बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं और उपकरणों की खरीद के लिए सांसद सोनिया गांधी ने अपनी निधि में बची पूरी धनराशि दे दी थी।
कोरोना संकट से निपटने के लिए सांसद निधि के 1.32 करोड़ रुपये स्वास्थ्य विभाग ने खर्च कर दिए। सैनिटाइजर, मैट्रेस, डिस्ककैप, हॉस्पिटल बेड, डिपोजल शू कवर, पल्स ऑक्सीमीटर, आईआर थर्मामीटर, ऑक्सीजन सिलेंडर, वाशिंग मशीन, नेबुलाइजर मास्क, वीटीएम आदि की खरीद में दोगुने से अधिक तक का अंतर है। खरीद का यह अंतर ही स्वास्थ्य विभाग की मनमानी को दर्शाता है।
10,560 और 3500 रुपये में मिले थर्मामीटर
पिछले साल कोरोना काल के दौरान इंफ्रारेड थर्मामीटर के रेट में बड़ा अंतर देखने को मिला। 10,560 रुपये कीमत के 20 थर्मामीटर के लिए 2.11 लाख रुपये खर्च किए गए। इसी के बाद 20 थर्मामीटर 1.01 लाख रुपये में खरीदे गए। बाद में 50 थर्मामीटर खरीदने में महज 1.75 लाख रुपये खर्च किए गए।
इन 50 थर्मामीटरों की कीमत महज 3500 रुपये पड़ी। पल्स ऑक्सीमीटर के रेट में भी अंतर रहा। पहले 2590 रुपये कीमत के पल्स ऑक्सीमीटर खरीदे गए। बाद में खरीदे गए पल्स ऑक्सीमीटर प्रति पीस 2800 रुपये के मिले।
पहले 6372 रुपये में, फिर 7316 रुपये में खरीदे बेड
2020 में स्वास्थ्य विभाग ने सांसद निधि मिलने के बाद दो बार में 100 हॉस्पिटल बेड खरीदे। पहले 50 बेड 3,18,600 रुपये में खरीदे। इसी के 10 दिन बाद 50 बेड 3,65,800 रुपये में खरीदे। पहले प्रति बेड 6372 रुपये में पड़ा, जबकि दोबारा में यही बेड 7316 रुपये कीमत का पड़ा। निट्रिल ग्लब्स भी पहले 8.60 रुपये फिर 11.49 रुपये में खरीदा। 2,29,800 रुपये में 20,000 और 86,000 रुपये में 20,000 निट्रिल ग्लब्स की खरीदारी की।
5600 रुपये वाला ऑक्सीजन सिलेंडर 9150 रुपये में खरीदा
स्वास्थ्य विभाग ने 25 ऑक्सीजन सिलेंडर भी पिछले साल सांसद की निधि से खरीदे थे। 5600 रुपये के हिसाब से पांच ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए 28 हजार पेमेंट करने के बाद 20 सिलेंडरों के लिए 1.83 लाख का भुगतान कर दिया। बाद में सिलेंडर 9150 रुपये कीमत का पड़ा। कोरोना जांच के लिए किट (वीटीएम) भी 100 से लेकर 246 रुपये में परचेज की गई।
तीन बार में खरीदी 4250 मैट्रेस, हर बार रेट में अंतर
बेडों पर चादर के नीचे बिछाने के लिए खरीदी की मैट्रेस (रबड़ की चादरें) की खरीदारी में भी रेट में बड़ा अंतर रहा। चार हजार मैट्रेस 219 रुपये कीमत के हिसाब से खरीदी। 150 मैट्रेस 295 रुपये और 100 मैट्रेस 309 रुपये की कीमत से खरीदी गई।
खरीदीं पांच वाशिंग मशीनें, पता एक का भी नहीं
सांसद निधि से स्वास्थ्य विभाग ने पांच वाशिंग मशीनें खरीदी थीं। यह दीगर बात है कि वाशिंग मशीनों का अता-पता नहीं है। 16,900 रुपये कीमत की पांच वाशिंग मशीनों पर 84,500 रुपये का भुगतान कर दिया गया था। विभाग के अफसरों तक को पता नहीं है कि ये मशीनें कहां गईं।
मनमानी खरीद के कारण ही दूसरी लहर में वापस ले लिया बजट
सांसद निधि से कोरोना की पहली लहर में पिछले साल 1.32 करोड़ की खरीद में आशंका होने के कारण दूसरी लहर में इस साल दिए 1.17 करोड़ में स्वास्थ्य विभाग मात्र 20.77 लाख रुपये खर्च कर पाया। प्रशासनिक अधिकारियों की सतर्कता के कारण स्वास्थ्य विभाग के अफसर निधि से खरीदारी में इस साल मनमानी नहीं कर पाए। शेष बजट को वापस लेकर जिला अस्पताल में सभी बेडों तक ऑक्सीजन लाइप लाइन बिछाने का काम कराया गया।
पिछले साल सांसद निधि से स्वास्थ्य विभाग को कोरोना काल में 1.32 करोड़ रुपये खरीदारी के लिए दिए गए थे। खरीदी गई सामग्री व उपकरणों के संबंध में पूरी रिपोर्ट मांगी गई है। इस साल 1.17 करोड़ में 20.77 लाख खर्च होने के बाद शेष धनराशि वापस ले ली गई थी।
प्रेमचंद्र पटेल, परियोजना निदेशक, डीआरडीए