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Raebareli News: पेट व छोटी आंत के बीच रास्ता बनाकर दिया नया जीवन

Tue, 22 Apr 2025 12:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
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रायबरेली। 26 साल की युवती को पिछले एक साल से लगातार उल्टी, पेट में भारीपन के साथ ही वजन में गिरावट की समस्या थी। इधर-उधर भटकने के बाद अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की ओपीडी में उप चिकित्सा अधीक्षक व सर्जन डॉ. नीरज कुमार श्रीवास्तव से चिकित्सीय सलाह ली। जांच में गैस्ट्रिक की समस्या की पुष्टि हुई।
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उसके पेट और छोटी आंत की नली सिकुड गई थी। इससे मार्ग सकरा होने के कारण आहार पेट में पहुंचने में दिक्कत होती थी। मरीज की सर्जरी अत्याधुनिक न्यूनतम इनवेसिव तकनीक से की गई। अब युवती पूरी तरह से स्वस्थ है। अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि युवती की हालत बेहद खराब थी।

छोटी आंत सिकुड़ने के कारण उसकी तकलीफ बढ़ती जा रही थी। ऑपरेशन करके गैस्ट्रिक आउटलेट ऑब्स्ट्रक्शन का निदान किया गया है। यह एक ऐसी स्थिति होती है जिसमें पेट से आंत तक भोजन का मार्ग संकरा हो जाता है, जिससे भोजन का सामान्य रूप से गुजरना मुश्किल हो जाता है।
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सर्जरी से पूर्व मरीज की इमेजिंग, एंडोस्कोपी और विभिन्न प्रयोगशाला परीक्षण कराए गए। सर्जरी में पेट और छोटी आंत के बीच एक नया मार्ग बनाकर आंत के सिकुड़े हुए हिस्से को बायपास किया गया। इस सर्जरी में डॉ. अमृतांशु, डॉ. शिरीष, और जूनियर रेजिडेंट् डॉ. सोमतीर्थ, डॉ. अक्षय और डॉ. शेषनाथ शामिल रहे। एनेस्थीसिया का प्रबंधन डॉ. अलीम ने किया।

युवती बोली-उम्मीद ही छोड़ दी थी, अब राहत
सर्जरी के बाद स्वस्थ हुई सावित्री (काल्पनिक नाम ) का कहना है कि एक साल तक वह बिना उल्टी किए कुछ भी नहीं खा पाती थी। वजन और ताकत दोनों कम हो गए थे। हर दिन खुद को बेहद कमज़ोर महसूस करती थी। सर्जरी के बाद धीरे-धीरे दोबारा खाने लगी। डॉक्टर और नर्सों ने बहुत अच्छी तरह से देखभाल की। आज मैं खुद को फिर से स्वस्थ महसूस कर रही हूं। पहले तो उम्मीद ही छोड़ दी थी।
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