रायबरेली जिला अस्पताल के बर्न वार्ड के समीप स्थित गोदाम से शुक्रवार को अचानक तेज गंध के साथ गैस का रिसाव होने लगा। कई वार्डों तक इसके पहुंचने से धुंध छाने के साथ ही मौजूद लोगों की आंखों में जलन व आंख और नाक से पानी गिरने लगा। इससे अस्पताल परिसर में मौजूद मरीजों व मेडिकल स्टाफ में हड़कंप मच गया। इससे बचने के लिए वार्डों में मौजूद मरीज अपने तीमारदारों के साथ बेड़ छोड़कर भागने लगे। रिसाव के दौरान अस्पताल के बच्चा समेत अन्य वार्डों में करीब दो सौ मरीज भर्ती थे।
हादसे की खबर मिलते ही जिलाधिकारी डीएम माला श्रीवास्तव, एसपी आलोक प्रियदर्शी, सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह समेत अन्य आला अधिकारी भी बचाव कार्य की निगरानी को मौके पर पहुंचे। फायर विभाग की टीम ने मौके से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। सभी लोगों के पूरी तरह सुरक्षित रहने और हादसा टल जाने की पुष्टि के बाद ही आला अफसरों ने राहत की सांस ली। इस संबंध में सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने शुरुआती जांच व लक्षण के आधार पर गोदाम से फार्मेलिन गैस के रिसाव की आशंका जताई है। उन्होंने बताया कि इसकी अंतिम पुष्टि जांच कार्य में जुटी टीम की रिपोर्ट के बाद होगी।
वार्ड में भर्ती मरीजों व उनके तीमारदारों ने बताया कि शुक्रवार को जिला अस्पताल में दोपहर बाद करीब 2.30 बजे बर्न वार्ड के पास बने एक गोदाम से अचानक धुंध छाने के साथ गैस का रिसाव शुरू हो गया। देखते ही देखते इसका प्रभाव हड्डी वार्ड, महिला वार्ड, बच्चा वार्ड, सर्जिकल वार्ड सहित अन्य वार्डों में दिखने लगा।
गैस के प्रभाव से सभी को सांस लेने में परेशानी के साथ उनकी आंखों में जलन के साथ ही आंख व नाक से पानी गिरने लगा। इससे किसी अनहोनी की आशंका से भयभीत भर्ती मरीजों व उनके तीमारदारों में बचने के लिए भगदड़ मच गई। सभी ने वार्डों से बाहर निकल कर बचने के लिए भागना शुरू कर दिया। मौजूद अस्पताल स्टाफ व पुलिस की मदद से किसी तरह सभी ने अस्पताल के बाहर खुले आसमान के नीच पहुंचकर अपनी जान बचाई। अस्पताल में जहरीली गैस के रिसाव की सूचना से प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया। आनन फानन में बचाव कार्य की निगरानी के लिए डीएम व एसपी के साथ ही अन्य अधिकारी भी अस्पताल में पहुंच गए। मौजूद फायर ब्रिगेड के जवान भी बचाव कार्य के लिए मौके पर पूरी टीम के साथ जुटे नजर आए। हालांकि इस दौरान गोदाम में भारी गैस रिसाव के कारण कोई भी अंदर जाने की हिम्मत नही जुटा पाया। थोड़ी देर रिसाव थमने के साथ ही स्थिति संभली।
ऑक्सीजन की आपूर्ति भी रोकी
गैस के रिसाव के बाद जिला अस्पताल के वार्डों में ऑक्सीजन की आपूर्ति को पूरी तरह से ठप कर दिया गया। इससे मरीजों को ऑक्सीजन के लिए परेशानी हुई। हालांकि सिलेंडरों के माध्यम से मरीजों को आक्सीजन देने का प्रयास किया गया। वार्डों में एक-एक बेड पर दो-दो मरीज भी शिफ्ट कराए गए।
निरीक्षण के बाद मरीजों से मिलीं डीएम, होगी जांच
जिला अस्पताल में गैस रिसाव की सूचना के बाद पहुंची डीएम माला श्रीवास्तव ने मौके का निरीक्षण करने के बाद वार्डों में भर्ती मरीजों के पास पहुंचकर उनका हालचाल जाना। बताया कि फिलहाल गैस रिसाव की घटना में सभी पूरी तरह सुरक्षित है। कौन सी गैस का रिसाव किस कारण से हुआ इस पूरे मामले की जांच का निर्देश सीएमओ को दिया गया है। डीएम ने बताया कि फिलहाल हादसे के समय वार्डों में भर्ती सभी मरीज पूरी तरह से स्वस्थ और सुरक्षित हैं। गैस की वजह से किसी को भी खतरनाक परेशानी नही हुई। गोदाम के आसपास स्थित सभी वार्डों को भी मरीजों से पूरी तरह खाली करा दिए गया है।
मौके पर बेकार साबित हुए अग्निशमन यंत्र
गैस रिसाव के बाद अग्निशमन विभाग की टीम ने अस्पताल पहुंचकर गैस की दुर्गंध को कम करने के लिए वार्डों की खिड़कियों में लगे शीशे के साथ ही जालियों को हटाने का प्रयास शुरू किया। इस दौरान वार्ड में मौजूद अग्निशमन यंत्रों को चेक कर उपयोग में लाने की कोशिश की गई तो एक भी चलने लायक नहीं मिला। एक अग्निशमन यंत्र के पाइप से तो गंदा पानी निकलता देख सभी लोग चौक पड़े।
सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह का कहना है कि ऑपरेशन थिएटर को जीवाणु और मच्छरों से मुक्त रखने के लिए फार्मेलिन केमिकल का प्रयोग होता है। गोदाम में इसी केमिकल को रखा गया था। इसी कारण आशंका है कि वार्डों में हुए रिसाव में फैली गैस फार्मेलिन हो सकती है। यह एक तीखी गंध वाली, ज्वलनशील और रंगहीन गैस है। यह एक ऐसा केमिकल कंपाउंड है, जो कार्बन, हाईड्रोजन और ऑक्सीजन से तैयार होता है। इस गैस के संपर्क में आने से आंख, नाक, कान और गले में जलन की समस्या होती है। ज्यादा देर तक इस गैस के संपर्क में रहने से त्वचा पर चकत्ते पड़ने और सांस फूलने की समस्या भी हो जाती है। मामले की जांच के बाद ही पूरी तरह साफ हो सकेगा कि अस्पताल में किस गैस का रिसाव हुआ।