रायबरेली। मेरठ से प्रयागराज तक करीब 596 किलोमीटर तक बनने वाले गंगा एक्सप्रेस-वे के लिए किसानों की भूमि अधिग्रहीत करने का काम शुरू हो गया है। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) ने 12 जिलों के किसानों से जमीन लेने के लिए 340 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं। इसमें रायबरेली को करीब 15 हजार किसानों की जमीन लेने के लिए 35 करोड़ मिले हैं। यह एक्सप्रेस-वे जिले में एक हजार हेक्टेयर जमीन से होकर गुजरेगा। सरकार ने मेरठ से प्रयागराज तक की यात्रा को और सुगम करने के लिए गंगा किनारे एक्सप्रेस-वे प्रस्तावित किया है।
यह एक्सप्रेस-वे जिले की लालगंज, डलमऊ, ऊंचाहार व सलोन तहसील क्षेत्र के गंगा कटरी के गांवों से होकर निकलेगा। पिछले सप्ताह यूपीडा के विशेष कार्याधिकारी सीआर पटेल ने यहां आकर अब तक जिले स्तर पर की गई तैयारियों की समीक्षा करने के साथ ही किसानों की जमीन चिह्नित करके भूमि अधिग्रहीत करने का काम शुरू करने का आदेश दिया था।
मेरठ से प्रयागराज तक गंगा के किनारे के किसानों की जमीन खरीदने करने के लिए यूपीडा ने बजट भी जारी कर दिया है। एक्सप्रेस-वे में आने वाले 12 जिलों के लिए जारी किए गए 340 करोड़ रुपये में जिले को 35 करोड़ दिए गए हैं। बजट मिलने के साथ ही जिले में 15 हजार किसानों की भूमि अधिग्रहीत करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जल्द ही भूमि अधिग्रहण का काम पूरा होने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
जिले के गंगा कटरी क्षेत्र की तहसीलों से करीब एक हजार हेक्टेयर की जमीन से होकर गंगा एक्सप्रेस-वे निकलेगा। इसमें काफी जमीन ऐसी भी जो ग्राम पंचायत व सरकारी है। इन जमीन के लिए प्रशासन से बजट नहीं खर्च करना होगा। एक हजार हेक्टेयर में किसानों की पड़ने वाली जमीन को चिह्नित कराने के लिए तहसीलों से जांच कराई जा रही है। इसी सप्ताह रिपोर्ट आ जाएगी।
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) से गंगा एक्सप्रेस-वे की जमीन के लिए 35 करोड़ रुपये मिले हैं। जिले के करीब 15 हजार किसानों से जमीन ली जानी है। एक हजार हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। इसमें किसानों की जमीन चिह्नित कराई जा रही है। जल्द ही वे के लिए जमीन अधिग्रहीत कराने का काम शुरू कराया जाएगा। - राम अभिलाष, एडीएम (प्रशासन)