सिंचाई विभाग के अधिकारी और कर्मचारी पहुंचे तो किसानों ने उनका घेराव कर पटरी बांधने से रोक दिया। मौके पर पहुंची कई थानों की पुलिस ने किसी तरह किसानों को शांत कराया।
देर रात तक सिंचाई विभाग के अधिकारी, कर्मचारी पटरी बांधने में जुटे रहे। बेहीखोर गांव से होकर गंग नहर निकली है, जो एनटीपीसी तक गई है।
बताते हैं कि अधिक पानी छोड़ दिए जाने के कारण नहर की पटरी बेहीखोर गांव के पास कट गई। चूंकि पानी की तेज बहाव था। इसलिए गांव की करीब 500 बीघे धान की फसल जलमग्न हो गई।
इसकी सूचना मिलते ही किसान मौके पर पहुंचे। सूचना देने के बावजूद सिंचाई विभाग के अधिकारी और कर्मचारी लेट पहुंचे। इससे किसानों का गुस्सा फूट पड़ा।
किसानों ने अधिकारियों, कर्मचारियों का न सिर्फ घेराव किया, बल्कि उन्हें खूब खरीखोटी सुनाई। उन्हें नहर की पटरी बांधने से रोक दिया।
किसानों का गुस्सा देख सूचना पर पुलिस को दी गई। जगतपुर, गदागंज थाने की फोर्स मौके पर पहुंची। किसान शुभेंद्र कुमार, सतीश, दिनेश आदि का कहना था कि तेज पानी नहर में छोड़ने से धान की फसल जलमग्न हो गई है।
अधिकारियों, कर्मचारियों की लापरवाही के चलते आए दिन नहर की पटरी कट जाती है, जिसका खामियाजा हम लोगों को भुगतना पड़ता है। पुलिस के समझाने पर किसान शांत हुए।
देर रात तक कटी नहर की पटरी नहीं बंध पाई थी। एसओ जगतपुर कमलेश पांडेय का कहना है कि सूचना पर पहुंचकर किसानों को शांत कराया गया। पानी अधिक छोड़ दिए जाने के चलते नहर की पटरी कटी थी।
सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता पीके खन्ना का कहना है कि बेहीखोर गांव के पास गंग नहर की पटरी कटी थी। किसानों ने नाराजगी जताई थी, लेकिन उन्हें समझाकर शांत करा दिया गया। नहर की कटी पटरी बंधवाई जा रही है।