रायबरेली। कोहरा व गलन से लोग बेहाल हैं। रात में पाला पड़ने से फसलें भी प्रभावित हो रही हैं। तापमान में असंतुलन की स्थिति है। धूप निकलने से राहत मिलती है, लेकिन दिन ढलने के साथ सर्दी लोगों को परेशान कर रही है। पाला और गलन अधिक होने से सब्जी की फसल को अधिक नुकसान हो रहा है।
शनिवार को सुबह कोहरा पड़ा और उसके बाद धूप निकली तो कोहरा छंट गया। दोपहर में लोगों ने धूप का आनंद लिया। अन्य दिनों की तुलना में हवा की रफ्तार औसत रही। धूप निकलने के बाद भी गलन अधिक रही। शाम को सड़क पर रात गुजारने वाले लोगों को अलाव का सहारा लेना पड़ा। सुबह छह बजे से दस बजे तक धूप नहीं निकली और कोहरा होने के साथ धुंध छाई रही।
आसमान में बादल होने से बारिश की आशंका भी बनी रही। सुबह 11 बजे जब धूप निकली तो जनजीवन में तेजी दिखाई पड़ी। शनिवार को अधिकतम तापमान 18.4 डिग्री व न्यूनतम तापमान 11 डिग्री रहा। अधिकतम तापमान सामान्य से तीन डिग्री कम रहा। न्यूनतम तापमान औसत रहा। इंदिरा गांधी उड़ान अकादमी फुरसतगंज के मौसम विशेषज्ञ दीतेंद्र सिंह ने बताया कि आने वाले दिनों में हवा का दबाव बढ़ेगा तो कोहरा के साथ तापमान में गिरावट दर्ज होगी।
चार रैन बसेरों में की गई रुकने की व्यवस्था
शहर में प्रशासनिक स्तर पर चार रैन बसेरे बनाए गए हैं। जिला अस्पताल चौराहा, सुपर मार्केट, बस स्टेशन व रेलवे स्टेशन पर रैन बसेरे बनाए गए हैं। यहां पर दिन-रात लोगों के रुकने की व्यवस्था की गई है। सबसे बड़ा रैन बसेरा रेलवे स्टेशन पर बनाया गया है। यहां पर 20 बेड की व्यवस्था की गई है। केयर टेकर को नियुक्त किया गया है।
नहीं जल सके अलाव
भीषण सर्दी में हर चौराहे पर अलाव की व्यवस्था नहीं है। कुछ जगहों पर ही अलाव जल रहे है। अलाव जलवाने के लिए बजट आया है, लेकिन इसके बाद भी जिम्मेदार अलाव जलवाने में कंजूसी दिखा रहे हैं।
उद्यान विभाग ने जारी की गाइडलाइन
सतांव। कोहरे से किसान परेशान हैं। किसानों का कहना है कि कोहरा और पाला ऐसे ही गिरता रहा तो मटर, टमाटर, आलू व गोभी आदि सब्जियों की फसलें बर्बाद हो जाएंगी। जिला उद्यान अधिकारी अधिकारी जयराम वर्मा ने गाइडलाइन जारी कर दी है। बताया कि पाला से टमाटर में झुलसा रोग लगता है।
रोग लगने पर पहले पत्तियां किनारे से सिकुड़ती हैं और इनका रंग भूरा होने लगता है। किसान कार्बोडिजम 12 प्रतिशत, मैंकोजब 63 प्रतिशत डब्ल्यूपी दवा 2.5 से 3 ग्राम प्रति लीटर में घोलकर छिड़काव करें। सरसों की फसल को माहू से बचाने के लिए नीम का तेल तीन मिलीलीटर प्रति लीटर हल्के गर्म पानी में घोलकर छिड़काव करें। केले की फसल को बचाने के लिए पॉलीथिन के कवर से फल को ढक दें।