यूपी के अमेठी में मोहनगंज के पूरे रानी मजरे तिलोई में नौ साल पहले डकैती के बाद मां-बेटे की हत्या के मामले में रायबरेली की अदालत ने पांच दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने बृहस्पतिवार को फैसला सुनाते हुए प्रत्येक दोषी पर डेढ़ लाख रुपये अर्थदंड लगाया। अर्थदंड न देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
बताते चलें कि 24 मई 2017 को पूरे रानी मजरे तिलोई में श्यामा और उनके बेटे मदन की हत्या के बाद घर में डकैती की गई थी। बब्बन की सूचना पर पुलिस ने जांच के दौरान छह आरोपियों को गिरफ्तार करके लूटे गए सामान की बरामदगी की थी। सुनवाई के दौरान रायबरेली के डलमऊ क्षेत्र के अमरहा निवासी सुरेश उर्फ मनोज की मौत हो गई। इसके बाद पांच आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रही।
ये आरोपी ठहराए गए दोषी
अदालत ने मोहनगंज के पूरे गढ़ी अलादीन मजरे भीखूपुर निवासी ओमप्रकाश उर्फ जगदीश, कल्लू उर्फ वीरेंद्र और टिल्कू उर्फ समर बहादुर तथा रायबरेली के महाराजगंज क्षेत्र के असनी गांव निवासी आशीष उर्फ नन्हा और मुकेश उर्फ अरविंद को दोषी ठहराया। पांचों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई। ओमप्रकाश, कल्लू और टिल्कू इन्हौना थाने के हिस्ट्रीशीटर हैं।
नौ साल की लड़ाई के बाद मिली राहत
मां श्यामा और छोटे भाई मदन की हत्या के बाद बब्बन और उनका परिवार नौ साल से फैसले का इंतजार कर रहा था। मुकदमे की पैरवी के दौरान आरोपियों की ओर से दबाव और प्रलोभन दिए जाने के बावजूद परिवार पीछे नहीं हटा। बब्बन और उनकी पत्नी राजकली ने बताया कि वे किसी दबाव में नहीं आए और लगातार पैरवी करते रहे।
पांचों आरोपियों को उम्रकैद की सजा मिलने की जानकारी हुई तो परिवार को बड़ी राहत मिली। बब्बन ने कहा कि देर से ही सही, हत्यारों को सजा मिली। बताया कि मृतक मदन की पत्नी गायत्री और उसका 12 वर्षीय दिव्यांग बेटा सक्षम घटना के बाद से मायके में रह रहे हैं।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत हुई प्रभावी पैरवी
एसपी सरवण टी. ने बताया कि ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत गंभीर अपराधों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए पुलिस लगातार प्रभावी पैरवी कर रही है। इस मामले में भी अभियोजन पक्ष के साथ समन्वय कर प्रभावी पैरवी कराई गई।