रायबरेली। जिले की 34 लाख आबादी को आग से बचाने के लिए अग्निशमन केंद्रों पर मुट्ठी भर जवान तैनात हैं। स्टाफ और संसाधनों की कमी से दमकल गाड़ियां समय से घटनास्थल पर नहीं पहुंच पाती।
इसके बावजूद न तो स्टाफ बढ़ाया जा रहा और न ही संसाधन की कमी दूर करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। नतीजतन पीड़ित परिवार ही आग की तबाही रोकने के लिए जूझते हैं।
आग की घटनाएं को रोकने के लिए रायबरेली नगर, बछरावां, लालगंज, सलोन में फायर स्टेशन संचालित हैं। इन पांच फायर स्टेशनों में महज 69 अग्निशमन कर्मचारी तैनात हैं।
एक साल से यहां मुख्य जिला अग्निशमन अधिकारी का पद भी रिक्त हैं। हादसा होने पर समय से दमकल गाड़ियां नहीं पहुंच पाती जिससे सब कुछ तबाह होने के बाद ही आग बुझ पाती है।
महराजगंज में जल्द शुरू होगा फायर स्टेशन
जिले के महराजगंज तहसील में नया फायर स्टेशन बनकर तैयार है। जल्द ही इसके संचालन को हरी झंडी मिलने की उम्मीद है।
वर्ष 2012 में ही ऊंचाहार में फायर स्टेशन बनाए जाने को हरी झंडी मिली, लेकिन जमीन न मिलने के कारण फायर स्टेशन निर्माण शुरू नहीं हो पाया। आग की घटनाओं को काबू में करने के लिए ऊंचाहार और सरेनी में सीजनल फायर स्टेशन बनाया गया है।
साढ़े चार माह में तीन करोड़ की संपत्ति जली
आग की घटनाएं लोगों के अरमान पर इस तरह पानी फेर रही हैं कि इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2022 के साढ़े चार माह में आग की 150 घटनाएं हुई। इसमें तीन करोड़ की संपत्ति जलकर खाक हुई। घर जलने के साथ उसमें रखा कपड़ा, अनाज समेत अन्य सामान जल गया। गनीमत रही कि कोई जनहानि नहीं हुई। वहीं वर्ष 2021 में अग्निकांड की 684 घटनाएं हुईं। लगभग 3.65 करोड़ रुपये की क्षति हुई। दो लोग और 15 पशु आग की भेंट चढ़ गए।
फायर स्टेशनों पर 14 दमकल गाड़ियां
फायर स्टेशन रायबरेली, लालगंज, बछरावां, सलोन में कुल मिलाकर छोटी-बड़ी मिलाकर 14 फायर टेंडर (दमकल गाड़ियां) हैं। इसमें किसी फायर टेंडर में साढ़े चार हजार लीटर पानी की क्षमता है तो किसी फायर टेंडर में ढाई हजार लीटर की पानी की क्षमता है। जिले की आबादी को देखते हुए दोगुने फायर टेंडर की जरूरत है, ताकि आग की घटनाओं को मौके पर तत्काल बुझाया जा सके।