सतांव। सई नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से नदी किनारे बसे गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। खेतों और रास्तों में पानी भरने से ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है। करीब 500 बीघा में धान, उड़द, ज्वार और मेंथा की फसल जलमग्न हो गई है। खेत तालाब में तब्दील हो गए हैं। लगातार जलभराव से फसल सड़ने की आशंका है।
झबरा मजरे कोरिहर गांव के किसान नान्हू, रामनरेश शंकर, रामदीन, मातादीन, राम विलास, रामसेवक, रामदास और रामकुमार ने बताया कि धान की अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। खाद-बीज के लिए कर्ज भी लिया था, लेकिन नदी का पानी खेतों में भरने से फसल बर्बाद होने का खतरा पैदा हो गया है। किसानों ने बताया कि जलस्तर जल्द नहीं घटा तो फसल सड़ जाएगी।
पोरई से बिरवल, झबरा से ढकिया और पूरे विक्रम मजरे बरदर को जोड़ने वाली सड़कों पर भी पानी भर गया है। इससे ग्रामीणों के साथ स्कूल जाने वाले बच्चों को भी परेशानी हो रही है। खेतों तक पहुंचना भी मुश्किल हो गया है। लेखपाल अरविंद कुमार, लक्ष्मी और अंशिका जायसवाल ने बताया कि प्रभावित किसानों की फसलों के नुकसान का जायजा लिया जा रहा है। रिपोर्ट जल्द अधिकारियों को भेजी जाएगी।
इन गांवों में भी जलभराव
सई नदी के उफान से सतांव ब्लॉक के कहुवा, कंदूरी, शहरीकौड़ी, मुकुंदखेड़ा, शिवलहा, बरदर, पूरे सूजान, शिवमंगलखेड़ा, पोरई, बड़ी बिरवल, छोटी बिरवल, झबरा, पूरे शिवबख्श, पूरे अंबर, पूरे चौहानन और पूरे रत्ती गांव प्रभावित हैं।
सतांव के झबरा गांव के पास सई नदी का जलस्तर बढ़ने पर खेतों में भरा पानी।