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Raebareli News: 30 हजार एमटी डीएपी और मिले तो दूर हो किसानों का दुखड़ा

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रायबरेली। जिले के करीब साढ़े चार लाख किसानों में डीएपी को लेकर हाहाकार मचा है। हालात ये हैं कि घंटों लाइन में लगने के बाद भी किसानों को एक बोरी खाद नहीं मिल पा रही है। करीब 30 हजार मीट्रिक टन डीएपी और मिले तो किसानों की परेशानी दूर हो। खाद संकट के चलते किसान गेहूूं की फसल की बुआई नहीं कर पा रहे हैं। खेत जोते हुए पड़े हैं।
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जिले में किसानों को खाद मुहैया कराने के लिए 1040 प्राइवेट दुकानें, जबकि 160 साधन सहकारी समितियां हैं। गेहूूं की बुआई का सीजन चल रहा है, लेकिन डीएपी संकट ने किसानों को मुसीबत में डाल दिया है।
हर रोज किसान एक बोरी खाद पाने के लिए साधन सहकारी समितियों के अलावा जिला मुख्यालय स्थित पीसीएफ कृषक सेवा केंद्र गोरा बाजार पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें खाद नहीं मिल रही है। घंटों लाइन में लगने के बाद केंद्र प्रभारी का जवाब मिलता है कि खाद समाप्त हो गई है। अब कल आना है।
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किसान इस उम्मीद के साथ वापस हो जाते हैं कि कल उन्हें खाद मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं होता। प्राइवेट दुकानों पर किसानों से अधिक दाम वसूले जा रहे हैं। अब तक जिले को 27 हजार मीट्रिक टन खाद मिली है। अभी करीब 30 हजार मीट्रिक टन खाद की जरूरत है। इतनी खाद आ जाए तो संकट कुछ हद तक दूर हो सकता है। जिला कृषि अधिकारी रवि चंद्र प्रकाश का कहना है कि यूरिया की रैक आ गई है। डीएपी की एक और रैक मंगाई गई है। जल्द जिले में खाद की कमी दूर हो जाएगी।
मंत्री ने लगाई फटकार, कहा जल्द दूर होगा खाद संकट
उद्यान, कृषि विपणन, कृषि विदेश राज्यमंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने जिला प्रशासन के अधिकारियों को फटकार लगाई और कहा कि कहीं भी खाद का संकट नहीं है। लोग उतनी ही खाद लें, जितनी जरूरत है। उन्होंने कहा कि डीएपी के साथ यूूरिया भी भरपूर मात्रा में मंगाई जा रही है, ताकि गेहूूं की बुआई के बाद फसल में खाद डालने का संकट न रहे। राज्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा है कि धान खरीद में किसानों को परेशान न किया जाए। पिछले साल के मुकाबले इस साल खरीद धीमी हो रही है। इसमें तेजी लाई जाए। उधर, डीएम माला श्रीवास्तव ने बताया कि किसान परेशान न हों, खाद की रैक फिर आने वाली है। खाद साधन सहकारी समितियों में भेजने के साथ निजी दुकानों में भी जा रही है। किसान उतनी ही खाद लें, जितनी वर्तमान में जरूरत हो।
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