रायबरेली। माह भर में एक किसानों को पांच बोरी खाद देने के आदेश के उलट बीते दिसंबर महीने में एक-एक किसान को 95 बोरी तक खाद बेच दी गई। सबसे अधिक खाद खरीदने वाले टॉप-20 किसानों को चिह्नित करके जांच के आदेश दिए गए हैं। मामले में खाद विक्रेताओं को नोटिस देकर तीन दिन में खाद की बिक्री के संबंध में जवाब देने के आदेश दिए गए हैं। इससे विक्रेताओं में हड़कंप मचा है।
गेहूं की बोआई के बाद अब यूरिया खाद की डिमांड बढ़ गई है। खाद विक्रेताओं को पीओएस मशीन से ही खाद की बिक्री के आदेश हैं। साथ ही एक किसान को एक माह में अधिक से अधिक पांच बोरी खाद देने के आदेश हैं।
दिसंबर में पीओएस मशीन से खाद की बिक्री की समीक्षा करने पर पता चला कि एक-एक किसान को 95 बोरी तक खाद बेच दी गई है। जिले में सबसे अधिक खाद खरीदने वाले 20 किसानों सुमित अग्रहरि, रंजीत कुमार मिश्रा, ओम प्रकाश, ऊषा देवी, वैभव पाठक, कृपाशंकर, परवेज आलम आदि की जांच के आदेश दिए गए हैं।
मामले में खाद विक्रेताओं राम आसरे पटेल नगर, शिव कुमार मित्तल बरवारीपुर, मौर्या खाद भंडार सलोन, देवी खाद भंडार सेमरी बाबूगंज, हुसैन खाद भंडार बेलागुसीसी, अनुभव ट्रेडर्स, देव नारायण खाद भंडार साकेत नगर, एग्री जंक्शन कमालगंज, उमंग टे्रडर्स राजामऊ, रायनी खाद भंडार छोटकवा खेड़ा, हरियाली किसान केंद्र गौरा, साधन सहकारी समिति पाहो, आदर्श कृषि सेवा केंद्र काजीपुर, पांडेय खाद भंडार निहस्था, आईएफएफडीसी कृषक सेवा केंद्र प्रधानपुर को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है।
जिला कृषि अधिकारी रवि चंद्र प्रकाश का कहना है कि 25 बोरी से अधिक खाद खरीदने वाले 20 किसानों को चिह्नित कर खाद विक्रेताओं को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। जवाब आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जिले में खाद की कमी नहीं, छह हजार एमटी यूरिया उपलब्ध
विभाग का दावा है कि जिले में यूरिया खाद की कमी नहीं है। अब भी दुकानों पर छह हजार एमटी से अधिक खाद उपलब्ध है। यूरिया के 56,278 मीट्रिक टन वार्षिक लक्ष्य के सापेक्ष 32,055 मीट्रिक टन खाद आ चुकी है। इसमें 26734 मीट्रिक टन यूरिया खाद का वितरण भी हो चुका है। अब तक सहकारिता को 15948 व निजी क्षेत्र की खाद दुकानों को 16107 मीट्रिक टन खाद मिल चुकी है। जिला कृषि अधिकारी रवि चंद्र प्रकाश का कहना है कि जिले में यूरिया खाद की कमी नहीं है। साधन सहकारी समितियों के साथ ही अन्य निजी दुकानों पर भी यूरिया पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। जल्द ही यूरिया और खेप आने वाली है। किसानों को यूरिया के लिए भटकना नहीं पड़ेेगा।