रायबरेली। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के आरक्षण को लेकर कयासबाजी का दौर शुरू हो गया है। जिले की 989 ग्राम पंचायतों की प्रधान पद की तकरीबन 673 आरक्षित सीटों में बदलाव लगभग तय माना जा रहा है।
वर्ष 2015 में जिस जाति के लिए सीट आरक्षित थी, इस बार उस जाति को आरक्षण का लाभ मिलने की उम्मीद कम है। कई सीटें अनुसूचित जाति से फिर सीधे अनारक्षित या महिला की झोली में जा सकती हैं। हालांकि शासन स्तर पर प्रस्ताव तैयार हो गया है। इसी सप्ताह दिशा-निर्देश आने के बाद डीएम के निर्देशन पर सीटों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची के पुनरीक्षण का काम अंतिम दौर में चल रहा है। इसी महीने अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन होगा। पदों के आरक्षण के लिए ग्राम पंचायतों की जातिवार जनसंख्या को ऑनलाइन फीडिंग करने का पूरा हो चुका है।
सीटों के आरक्षण को लेकर गांवों में कयासबाजी तेज हो गई है। ऐसा माना जा रहा है कि पिछले पंचायत चुनाव में प्रधान पद की सीटें जिस जाति के लिए आरक्षित थी, इस चुनाव में उस जाति को लाभ मिलने की उम्मीद कम है। वर्ष 2015 के चुनाव में अनुसूचित जाति के लिए जिले में प्रधान के 176 पद और अनुसूचित जाति महिला के लिए 81 पद आरक्षित थे।
पिछड़ा वर्ग के लिए 222 सीटें और पिछड़ा वर्ग महिला के लिए 93 सीटें आरक्षित की गई थी। यदि शासन स्तर पर तैयार प्रस्ताव में संशोधन नहीं किया गया तो इन सीटों के आरक्षण में संशोधन तय है। जिले में 316 सीटे ही अनारक्षित थीं।
101 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई थी। प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई तो जिले की प्रधान की कई सीटें सीधे अनुसूचित जाति से अनारक्षित हो सकती हैं। ऐसे में इन सीटों पर कड़े मुकाबले की उम्मीद बढ़ गई है। हालांकि इसी सप्ताह आरक्षण को लेकर दिशा-निर्देश आ सकते हैं, जिसके आधार पर डीएम के निर्देशन में आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होगी।