रायबरेली। बेसिक शिक्षा विभाग में अंतरजनपदीय स्थानांतरण के लिए गुरुवार को बीएसए दफ्तर में सुबह से उमड़ी भीड़ दोपहर तक कम नहीं हुई। सुबह दफ्तर खुलने से पहले ही ज्वाइनिंग के लिए विभिन्न जिलों से आए शिक्षकों की लाइन लग गई। भीड़ देख तीन अतिरिक्त काउंटर खोले गए। जिससे किसी शिक्षक को बिना ज्वाइन किए लौटना न पड़। देर शाम तक 586 में से 437 शिक्षकों ने बीएसए कार्यालय में कार्यभार ग्रहण कर लिया।
बेसिक शिक्षा विभाग में अंतरजनपदीय स्थानांतरण के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों से तबादला लेने वाले शिक्षकों की संख्या 586 है। जिसमें 451 महिलाएं और 135 पुरुष शामिल हैं। अपने-अपने जिलों से यहां कार्यभार ग्रहण करने के लिए पहुंचे शिक्षकों की लाइन सुबह 8.30 बजे से ही लग गई।
सभी को ज्वाइन करने की जल्दी थी। पहले एक काउंटर से ज्वाइनिंग शुरू कराई गई। भीड़ बढ़ने और महिलाओं की संख्या ज्यादा होने पर तीन और काउंटर खोले गए। जिसमें एक पुरुष तथा दो महिलाओं के लिए थे। दोपहर तक काउंटर पर भीड़ लगी रही। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आनंद प्रकाश शर्मा ने बताया कि 337 महिलाओं और 100 पुरुषों ने कार्यभार ग्रहण किया है।
बढ़ाया समय, स्कूल आवंटन 11-12 को
बेसिक शिक्षा परिषद ने रिलीविंग, ज्वाइनिंग और स्कूल आवंटन के लिए नई समयसारिणी जारी कर दी है। शिक्षकों की संख्या अधिक होने और समय कम मिलने के कारण यह फैसला लिया गया है। अब 6 फरवरी तक रिलीविंग व 9 फरवरी तक ज्वाइनिंग की जा सकेगी। स्कूल आवंटन के लिए 10 से 12 फरवरी की अवधि तय की गई है। बीएसए ने कहा कि 11 एवं 12 फरवरी को विद्यालय आवंटन किया जाएगा।
रिलीविंग के लिए नहीं आए शिक्षक
अंतरजनपदीय स्थानांतरण के अंतर्गत इस जिले के 423 अध्यापकों का तबादला हुआ था, लेकिन दो दिन तक चली रिलीविंग प्रक्रिया में 123 अध्यापक शामिल नहीं हुए। रिलीविंग का समय बढ़ा दिया गया है, फिर भी कोई शिक्षक कार्यमुक्त होने नहीं पहुंचा। इस जिले के स्थानांतरित होने वाले 423 अध्यापकों में 281 महिलाएं एवं 142 पुरुष शामिल थे।
मनचाहा विद्यालय पाने को होती रही सिफारिशें
कार्यभार ग्रहण करने आए शिक्षकों में मनचाहा स्कूल पाने को लेकर ज्यादा चिंता रही। यह वजह रही कि हर कोई जल्दी ज्वाइनिंग पाने की मशक्कत करता रहा। उन्हें यह अंदेशा था कि ज्वाइनिंग के आधार पर ही स्कूल आवंटन में भी मौका मिलेगा। मनचाहा स्कूल पाने के लिए सिफारिशों के साथ ही सेटिंग-गेटिंग की कोशिशें भी चलती रही। बीएसए का कहना है कि कार्यालय के अंदर या गेट के आसपास किसी बाहरी व्यक्ति को आने से रोका गया, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न होने पाए और शिक्षकों को कोई गुमराह न कर सके।