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कोरोना की लहर में लापरवाही : छह डॉक्टरों के भरोसे जिले में 5.40 लाख मासूमों की सेहत

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रायबरेली। जिले में करीब 5.40 लाख लॉडलों को महामारी से बचाने में सफलता प्राप्त करने के बाद अब कोरोना की तीसरी लहर के संभावित खतरे से उन्हें बचाना स्वास्थ्य विभाग के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है।
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वजह यह है कि जिले में चाइल्ड स्पेशलिस्टों की खासी कमी है। दो संविदा डॉक्टरों समेत छह चाइल्ड स्पेशलिस्टों के भरोसे स्वास्थ्य विभाग संचालित हो रहा है। सरेनी सीएचसी को छोड़ जिले के किसी भी ग्रामीण अस्पताल में चाइल्ड स्पेशलिस्ट तैनात नहीं है।
जिला अस्पताल में पांच डॉक्टर काम कर रहे हैं। वास्तव में जिले में तीसरी लहर आई और बच्चे चपेट में आए तो बच्चों की जान भगवान भरोसे होगी। ऐसे में अपनी सेहत के साथ ही अपने बच्चों की सेहत पर भी नजर रखें। तनिक भी समस्या हो तो तुरंत चिकित्सीय मदद लेकर बच्चों को सेहतमंद रखें।
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जिले में कोरोना का कहर थमने के बाद ब्लैक फंगस ने दस्तक दे दिया है। तीसरी लहर में बच्चों में संक्रमण का खतरा हो सकता है, लेकिन इससे निपटने की तैयारी दूर-दूर तक शुरू नहीं हो सकी हैं।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि स्वास्थ्य विभाग में चाइल्ड स्पेशलिस्टों की बेहद कमी है। यूं तो सभी सीएचसी में एक-एक चाइल्ड स्पेशलिस्ट होना चाहिए, लेकिन सरेनी को छोड़ जिले की अन्य 17 सीएचसी में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं हैं।
महिला महिला और पुरुष अस्पताल में दो संविदा सहित पांच चाइल्ड स्पेशलिस्ट काम कर रहे हैं। ऐसे में महामारी से बच्चों को बचाने के लिए विभाग के पास संसाधनों की बेहद कमी है।
बच्चेे की हालत गंभीर हो तो ही अस्पताल में कराएं भर्ती
एनएचएम के जिला शहरी समन्वयक विनय पांडेय का कहना है कि आने वाले दिनों में कोरोना का असर बच्चों पर होने की संभावना को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्रालय ने गाइडलाइन जारी की है।
गाइडलाइन के अनुसार, कोरोना से ग्रसित गंभीर बच्चों को ही अस्पताल में भर्ती करने की होगी। बाकी का इलाज होम आइसोलेशन में रखकर किया जा सकेगा। जिन बच्चों का ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे गिरता है, उन्हें कोविड अस्पताल में भर्ती किया जाना चाहिए।
बच्चों को स्टेरॉयड देने की मनाही है। सिर्फ गंभीर बच्चों को जरूरत पड़ने पर यह दवा देने की अनुमति दी जाएगी। रेमेडिसिविर, आइवरमेक्टिन, फैविपैराविर जैसी दवाओं को बच्चों को देने से मना किया गया है।
यदि बच्चों का ऑक्सीजन लेवल घटता है तो वे निमोनिया, एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम, सैप्टिक शाक आदि बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। ऐसी स्थिति में ही बच्चों को भर्ती करना जरूरी होगा।
बच्चों में क्या हो सकते हैं लक्षण
कोरोना के चपेट में आने के बाद बच्चों में लक्षण सामने आ सकते हैं। इसमें बुखार, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, थकावट, सूंघने व टेस्ट की क्षमता में कमी आना, नाक बहना, मांसपेशियों में तकलीफ, गले में खराश जैसे लक्षण हो सकते हैं।
कुछ बच्चों में दस्त आना, उल्टी होना, पेट दर्द हो सकता है। कुछ में मल्टी सिस्टम इफ्लामेट्री सिंड्रोम हो सकता है। ऐसी स्थिति में बच्चों को बुखार 100 डिग्री से अधिक हो जाएगा। इन बच्चों में खांसी, नाक बहना व गले में खराश जैसे लक्षण भी हो सकते हैं।
जिले में 10 साल से कम उम्र के बच्चे
ब्लॉक बच्चों की संख्या
शहर 40219
सरेनी 30169
ऊंचाहार 22812
हरचंदपुर 24002
सतांव 29042
खीरों 28138
डलमऊ 30260
जगतपुर 26812
राही 35434
बछरावां 30535
महराजगंज 33745
लालगंज 37299
शिवगढ़ 27969
अमावां 29242
रोहनियां 22939
गौरा 22691
सलोन 36373
छतोह 26474
डीह 20654
जिले में चाइल्ड स्पेशलिस्ट काफी कम हैं। अस्पतालों में दवाओं की कमी नहीं है। किसी भी महामारी से निपटने के लिए विभाग पूरी तरह से तैयार है। बच्चों से संबंधित पर्याप्त दवाएं अस्पतालों को मुहैया कराई गई है।
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डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ
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