रायबरेली। जिला अस्पताल में छह माह से बेकार पड़े ऑक्सीजन प्लांट को लेकर जिला प्रशासन गंभीर हो गया है। शासन से 11 लाख रुपये मिलने के बाद भी चार माह तक दबाए रखने और बजट के वापस होने के मामले में सीएमएस से जवाब मांगा गया है। इस संबंध में अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद अफरातफरी का माहौल है।
जिला अस्पताल में स्थापित ऑक्सीजन प्लांट सितंबर 2025 से बंद है। प्लांट के कंप्रेशर में खराबी आने से अस्पताल के 300 बेडों पर ऑक्सीजन की सीधी आपूर्ति ठप है। इससे सांस की समस्या के मरीजों के लिए खतरा बढ़ गया। प्लांट को ठीक कराने के लिए साइरेक्स कंपनी ने करीब 11 लाख रुपये मांगे। डिमांड पर शासन ने दिसंबर 2025 में ही जिला अस्पताल को 11 लाख रुपये दिए थे। अस्पताल प्रशासन ने मनमानी करते हुए चार माह तक बजट को खर्च नहीं किया। बीती 31 मार्च को ऑक्सीजन प्लांट को ठीक कराने के लिए आया बजट वापस हो गया।
माई सिटी में मंगलवार के अंक में ऑक्सीजन प्लांट ठप, मरम्मत के लिए मिले 11 लाख भी वापस शीर्षक से खबर प्रकाशित कर दी। खबर के माध्यम से अस्पताल प्रशासन की ओर से मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने में बरती जा रही मनमानी की पोल खोली गई।
खबर को संज्ञान में लेते हुए डीएम ने जिला अस्पताल के सीएमएस पुष्पेंद्र कुमार से जवाब मांगा है। इसके अलावा अलावा अस्पताल में करीब 60 लाख रुपये से स्थापित दूसरे ऑक्सीजन प्लांट को अब तक शुरू न कराने के संबंध में भी जवाब मांगा गया है। सीएमएस का कहना है कि डीएम ने ऑक्सीजन प्लांटों के संबंध में जवाब मांगा है।