रायबरेली। जिला कारागार में तैनात बंदीरक्षक मुकेश कुमार दुबे की पिटाई के मामले की जांच डीआईजी जेल संजीव त्रिपाठी ने पूरी कर ली है। जल्द ही वह रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपेंगे। बुधवार रात सात बजे डीआईजी ने जिला अस्पताल पहुंचकर घायल बंदी के बयान दर्ज किए। घटना के बाद से पांचों आरोपी बंदीरक्षक फरार हैं। सभी ने अपने मोबाइल भी स्विच ऑफ कर लिए हैं। पुलिस आरोपी बंदीरक्षकों की लोकेशन ट्रेस कर उन तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
जेल में तैनात बंदीरक्षक मुकेश कुमार दुबे से सोमवार शाम जेल में ही तैनात साथी बंदीरक्षक विजय सिंह, सौरभ वर्मा, परवेश सिंह, राजीव शुक्ला, जसवंत तोमर ने मारपीट की थी। बवाल का वीडियो भी सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। इस मामले में मारपीट करने वाले बंदीरक्षकों के खिलाफ सदर कोतवाली में एफआईआर दर्ज करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया गया था।
बुधवार को डीआईजी जेल ने जिला कारागार पहुंचकर जेल अधीक्षक अविनाश गौतम, जेलर सत्य प्रकाश सिंह, डिप्टी जेलर समेत स्टाफ के 42 लोगों के बयान दर्ज किए थे। देर शाम डीआईजी ने कारागार में तैनात सात बंदीरक्षकों के बयान भी लिए और उनसे विवाद की असल वजह पूछी।
डीआईजी ने अस्पताल पहुंचकर घायल बंदीरक्षक से प्रकरण की जानकारी ली। जेलर सत्य प्रकाश सिंह ने बताया कि डीआईजी ने पूरे प्रकरण की जांच कर ली है। वह अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। घटना के बाद से आरोपी बंदीरक्षक फरार हैं। सदर कोतवाल संजय त्यागी ने बताया कि बंदीरक्षकों की लोकेशन ट्रेस करके उनकी धरपकड़ का प्रयास किया जा रहा है।
वर्चस्व की लड़ाई या फिर कैंटीन है विवाद की जड़
जेल के अंदर बंदीरक्षकों के बीच विवाद की वजह वर्चस्व की लड़ाई या फिर कैंटीन है, यह चर्चा का विषय बना है। घायल बंदीरक्षक का आरोप है कि आरोपी ही कैंटीन का संचालन कर रहे थे। हमलावर उस पर बंदियों को दिए जाने वाले भोजन में मिलावट करने का दबाव बना रहे थे। ऐसा करनेे से मना किया तो उसके साथ मारपीट की गई।
उधर, जेलर सत्य प्रकाश का कहना है कि जेल के अंदर डिप्टी जेलर की मौजूदगी में कैंटीन संचालित होती है। घायल बंदीरक्षक आठ माह से जेल के अंदर भंडारण का कार्य देेख रहा था। पहले इस तरह की शिकायत बंदीरक्षक मुकेश ने नहीं की थी। बंदीरक्षकों में आपस में वर्चस्व की लड़ाई चल रही थी। इसी के चलतेे विवाद हुआ है।