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मृतक महिला के नाम अंकित करा दी गई करोड़ों कीमत की जमीन

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रायबरेली। सदर तहसील और कलेक्ट्रेट में भूमि हेराफेरी किए जाने का बड़ा खुलासा हुआ है। मृत महिला के नाम करोड़ों रुपये की बंजर जमीन सरकारी अभिलेखों में अंकित करा दी गई।
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मृत महिला के परिवारीजनों के नाम जमीन चढ़वाने के लिए कोर्ट से आदेश भी पारित करा दिया गया। मामले की शिकायत पर डीएम के निर्देश पर गठित छह सदस्यीय टीम ने जांच की तो हेराफेरी का खुलासा हो गया।
गुरुवार को सिटी मजिस्ट्रेट की तहरीर पर सदर कोतवाली पुुलिस ने कलेक्ट्रेट की तत्कालीन अभिलेखपाल समेत 11 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज कर लिया है।
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बीते दिन जिलाधिकारी से शिकायत की गई थी कि सदर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत रायबरेली-अयोध्या राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे उफरामऊ गांव स्थित करीब चार बीघा जमीन बंजर में दर्ज थी, जिसमें हेराफेरी की गई है।
डीएम ने छह सदस्यीय टीम गठित कर जांच कराई तो खुलासा हुआ कि राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से उफरामऊ गांव की रहने वाली स्व.सरजूदेई पत्नी ज्ञानधर प्रसाद के नाम बंजर जमीन को सरकारी दस्तावेजों में अंकित करा दिया गया।
यही नहीं स्व.सरजूदेई के वारिसों के नाम जमीन चढ़वाने के लिए एसडीएम कोर्ट से कूटरचित दस्तावेज तैयार करके आदेश भी पारित करा दिया गया। जमीन की कीमत दो करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है।
जांच रिपोर्ट मिलने पर डीएम ने मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। सदर कोतवाल अतुल सिंह ने बताया कि सिटी मजिस्ट्रेट एवं अभिलेखागार राजस्व प्रभारी अधिकारी युगराज सिंह की तहरीर पर तत्कालीन अभिलेखपाल राजस्व मंजूलता दीक्षित, कलेक्ट्रेट के एआरके देही अभिलेखागार राजस्व महादेव, तहसील कर्मी अभिलेखागार जमुना प्रसाद के अलावा उफरामऊ निवासी विद्याकांत, रमाकांत, श्रीकांत, गीता, विष्णुकांत, शिवाकांत, सोनल, पूर्वी अवस्थी के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
सदर तहसील में जमीन हेराफेरी का चल रहा खेल
सदर तहसील में तैनात अधिकारियों की मिलीभगत से शहर से लेकर देहात क्षेत्रों में सरकारी जमीन पर कब्जा करने और फर्जी तरीके से चढ़वाने का खेल चल रहा है। अधिकतर लेखपाल विभागीय कार्य से ज्यादा जमीन खरीद फरोख्त पर ध्यान दे रहे हैं।
कुछ तो ऐसे लेखपाल हैं, जो प्रापर्टी डीलर की भूमिका निभा रहे हैं। शहर क्षेत्र के प्रमुख इलाकों में सरकारी जमीन पर कब्जा करके अवैध निर्माण कराया जा रहा है। लेखपाल सेटिंग-गेटिंग करके चुप्पी साधे हैं।
हाल ये है कि तहसील में काफी संख्या में प्राइवेट लोग सरकारी कार्य कर रहे हैं। पैसों की खातिर यह भी दस्तावेजों में हेराफेरी करने से बाज नहीं आ रहे हैं। चकअहमदपूर नजूल, त्रिपुला चौराहा, गढ़ी खास समेत अन्य ऐसे स्थान हैं, जहां पर बड़े पैमाने पर सरकारी जमीनों में हेराफेरी की जा रही है, लेकिन यह देखने वाला कोई नहीं है।
एसडीएम नहीं उठाती हैं फोन
सदर तहसील में तैनात एसडीएम सदर अंशिका दीक्षित की ढिलाई जमीन की हेराफेरी की वजह बन रही है। सीयूजी नंबर पर फोन करने के बाद भी वह फोन नहीं उठाती हैं। अमर उजाला ने गुरुवार को दो बार सीयूजी नंबर पर फोन कर जमीन के प्रकरण का सच जानने का प्रयास किया गया। घंटी जाती रही, लेकिन उन्होंने फोन उठाना उचित नहीं समझा।
सदर तहसील के उफरामऊ गांव की बंजर की जमीन को हेराफेरी कर मृतक महिला के नाम अंकित करा देने के मामले में एफआईआर करा दी गई है। मामले में कार्रवाई कराई जाएगी।
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महिपाल पाठक, सीओ सदर
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