रायबरेली। ठंड बढ़ने के साथ ही सर्दी-खांसी के मरीजों की संख्या बढ़ गई। ठंड से सांस फूलने के साथ ही सीने में दर्द भी बढ़ गया है। शुक्रवार को 23 से अधिक मरीजों को भर्ती करके इलाज शुरू किया गया। वहीं, ओपीडी में 1600 से अधिक मरीज चिकित्सीय सलाह लेने के लिए पहुंचे। ठंड अधिक होने के कारण मरीजों को परेशानी हुई।
शुक्रवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में सुबह से ही भीड़ रही। परचा बनवाने के बाद मरीजों ने ओपीडी कक्षों के बाहर बारी आने का इंतजार किया। सर्वाधिक रोगी सर्दी, जुकाम, बुखार, सांस व सीने में दर्द के सबसे ज्यादा मरीज आए। ऐसे रोगी भी पहुंचे जो लंबी खांसी झेलकर सांस के रोगी बन चुके हैं। सीने में दर्द उठने के बाद इमरजेंसी पहुंचे रूपेश (37), अंजू देवी (23), रामआसरे (70), कलावती (65), राकेश कुमार (55), सुहैल (77), सांस की समस्या के शांती (32), सुखमीलाल (65), लल्लन (64), हर्ष कुमार (25), रामकुमारी (60), राजाराम (60) को भर्ती करके इलाज शुरू किया गया। इसके अलावा बुखार व उल्टी दस्त की चपेट में आए विकास (16), रामपती (60), नीतू (27), शशी (5), फहरान (5), रंजीत (23) को भर्ती करके इलाज शुरू किया गया। सीएमएस डॉ. पुष्पेंद्र कुमार का कहना है कि अस्पताल में जांच व इलाज के पर्याप्त बंदोबस्त हैं। समस्या होने पर मरीज को अस्पताल लाकर इलाज कराएं।
सर्दी में जरा सी अनदेखी सेहत पर भारी
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. राधाकृष्ण का कहना है कि तेज खांसी, सीने में दर्द, सांस फूलने के मामले बढ़ रहे हैं। सर्दी में थोड़ी सी अनदेखी सेहत पर भारी पड़ रही है। सर्द हवा नाक से होकर शरीर के भीतर पहुंचती है तो सबसे पहले अस्थमा के पुराने मरीजों की दिक्कत बढ़ती है। अस्थमा रोगियों को सांस लेने में घरघराहट होती है। साथ ही सर्द व शुष्क हवा शरीर के श्वसन नली को सिकोड़ देती है। इससे श्वसन नली में सूजन व जलन के साथ बलगम बढ़ जाता है तो वह सांस लेने में असुविधा उत्पन्न करते हैं।
जिला अस्पताल की ओपीडी में शुक्रवार को मरीज का स्वास्थ्य परीक्षण करते चिकित्सक व परचा बनवाने के