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Raebareli News: स्कूलों के विलय से बढ़ेंगी मुश्किलें, विरोध शुरू

Mon, 23 Jun 2025 12:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
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रायबरेली। बेसिक शिक्षा विभाग में परिषदीय विद्यालयों के विलय की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। कम छात्र संख्या वाले विद्यालयों को बंद कर उन्हें नजदीक के स्कूल में शिफ्ट करने की तैयारी है। इसके लिए जिले में कम छात्र संख्या वाले स्कूलों का ब्योरा मांगा गया है। शिफ्टिंग वाले विद्यालयों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। इससे कई स्कूलों पर ताला लटकने की संभावना है।
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स्कूलों के विलय से ग्रामीण परिवेश के बच्चों के सामने मुश्किलें आएंगी, क्योंकि शिफ्टिंग के बाद विद्यालयों की दूरी अधिक होने से बच्चों को स्कूल जाने के लिए लंबा चक्कर लगाना पड़ेगा। इसीलिए ग्रामीण क्षेत्र के लोग मुखर होने लगे हैं और आवाज उठा रहे हैं। शिक्षक संगठन भी धीरे-धीरे लामबंद होने लगे हैं। आंदोलन की रूपरेखा बनाई जा रही है।


जूनियर शिक्षक संघ 27 को भेजेगा ज्ञापन
रायबरेली। उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने विलय के विरोध में आंदोलन की रूपरेखा तैयार कर ली है। इसके तहत 27 जून को ब्लाक संसाधन केंद्रों में खंड शिक्षा अधिकारियों के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा। पांच जुलाई से बेमियादी आंदोलन शुरू करने की रणनीति बनाई गई है।
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जिलाध्यक्ष राघवेंद्र यादव ने बताया कि विद्यालयों के विलय के विरोध में प्रदेश नेतृत्व ने आरपार की लड़ाई का निर्णय लिया है। इसीलिए आंदोलन की रणनीति तैयार कर ली है, जिसके तहत इस जिले के शिक्षक भी पुरजोर आवाज उठाएंगे। उन्होंने कहा कि विलय को लेकर कोई छात्र संख्या निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन हर जिले अपने हिसाब से संख्या तय कर प्रक्रिया को आगे बढ़ा रहे हैं। स्कूलों के विलय का आदेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन है।


गरीबों को शिक्षा से वंचित करने की साजिश : विद्रोही
रायबरेली। भाकपा (माले) ने सरकारी विद्यालयों को बंद करने के मंसूबों के खिलाफ जन अभियान की शुरुआत की है। कुचरिया में हुई सभा में भाकपा माले के राज्य स्थायी समिति सदस्य कॉमरेड विजय विद्रोही ने सरकारी विद्यालयों की बंदी के सरकारी निर्णय को गरीबों को शिक्षा से वंचित करने की साजिश बताया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार ने अपने लंबे शासनकाल में एक भी स्कूल नहीं खोला। कम बच्चों का बहाना बनाकर स्कूलों को खत्म करने का प्रयास किया जा रहा है।

विद्रोही के मुताबिक शिक्षा का अधिकार अधिनियम जिस दिन प्रभाव में आया, उस समय चार लाख शिक्षकों की उत्तर प्रदेश में जरूरत आंकी गई थी। इसके सापेक्ष 25 प्रतिशत शिक्षकों की भर्ती की जा सकी है। प्रदेश के 80 फीसदी स्कूलों में बैठने के लिए कुर्सी-मेज की व्यवस्था नहीं है। सभा में जिला सचिव उदय पटेल, रामचंद्र वर्मा, इंद्र बहादुर यादव, डाॅ. हलीम महमूद, गायत्री देवी, राजेश कुमार, गुलाम अहमद आदि उपस्थित रहे।
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