पुरोहितों और पंडों को दान देकर परिवार के सुख समृद्धि की कामना की। यह सिलसिला पूरे दिन चलता रहा। मान्यता है कि पूर्णिमा पर गंगा स्नान से व्यक्ति के कष्ट दूर हो जाते हैं।
जिले के ऊंचाहार, डलमऊ, सरेनी, गदागंज क्षेत्र के गंगा तट पर श्रद्धालुओं ने स्नान किया। ऊंचाहार के गोकना घाट, तीर का पुरवा घाट, गोला घाट, खरौली घाट, बादशाह घाट पर स्नान के लिए सुबह से ही लोगों का जमावड़ा रहा।
श्रद्घालुओं ने डुबकी लगाई और पूजा-अर्चना की। हर-हर गंगे के जयकारे और घंटा- घड़ियाल की गूंज से घाटों पर पूरे दिन गूंजती रही।
डलमऊ प्रतिनिधि के मुताबिक क्षेत्र में करीब दो दर्जन गंगा घाट हैं। इनमें सबसे ज्यादा भीड़ सड़क घाट, किला घाट, रानी शिवाला घाट, संकटमोचन घाट, महावीरन घाट, पथवारी घाट, पक्का घाट पर रही।
स्नान के बाद लोगों ने पूजा अर्चना कर दान-पुण्य किया। गंगा तट के आसपास पुलिस बल भी तैनात रहा। सरेनी प्रतिनिधि के अनुसार क्षेत्र के गेगांसों तट और शिवपुरी तट पर आसपास क्षेत्र के लोगों ने स्नान किया।
सबसे अधिक भीड़ डलमऊ के घाटों पर रही। भक्तों के लिए तहसील प्रशासन और न ही नगर पंचायत की ओर से कोई व्यवस्था की गई। यहां तक कि नगर पंचायत ने घाटों के आसपास सफाई तक कराना मुनासिब नहीं समझा।
सड़क घाट के मार्ग पर जगह-जगह अतिक्रमण से लोगों को जूझना पड़ा। वहीं रायबरेली रोड पर रेलवे क्रासिंग के कारण जाम लगा रहा। इससे आने जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।